कोटा में प्रहलाद गुंजल का जंगी प्रदर्शन, सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान

मार्च 19, 2026 - 13:29
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कोटा में प्रहलाद गुंजल का जंगी प्रदर्शन, सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान

 कोटा में गैस किल्लत के विरोध में कांग्रेस का जंगी प्रदर्शन, प्रहलाद गुंजल ने सरकार पर साधा निशाना और 18 कॉलोनियों की सीलिंग का मुद्दा उठाया

कोटा। शहर में रसोई गैस की कथित किल्लत और कालाबाजारी के विरोध में बुधवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट पर बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कोटा उत्तर के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने किया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता गैस सिलेंडर की तख्तियां, झंडे और बैनर लेकर रैली के रूप में नयापुरा स्थित कार्यालय से कलेक्ट्रेट पहुंचे और केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान प्रहलाद गुंजल ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश और प्रदेश की जनता गैस की किल्लत से परेशान है, लेकिन सरकार इस समस्या को स्वीकार करने के बजाय इसे नकार रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को घर का चूल्हा जलाने के लिए भी 20 से 25 दिनों तक गैस सिलेंडर का इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर गैस की कालाबाजारी हो रही है और लोग महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।

 

गुंजल ने कहा कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण शहर के लगभग 50 प्रतिशत छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर हैं। होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और मैस संचालकों को गैस नहीं मिल रही है, जिससे उनका काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता और व्यापारी लगातार गैस की नियमित आपूर्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।

उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि वास्तव में गैस की कोई कमी नहीं है तो सरकार सार्वजनिक रूप से एडवाइजरी जारी क्यों नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ नेता जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।

प्रहलाद गुंजल ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और ट्रेड डील पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ जो व्यापारिक समझौते किए हैं, उनमें गैस और पेट्रोल की खरीद का जो मसौदा तैयार किया गया है, उससे भारत को बीमा और ट्रांसपोर्टेशन के कारण 8 से 10 गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार पहले ही घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर चुकी है और आने वाले समय में इसमें 105 रुपये की और वृद्धि की तैयारी है।

अपने संबोधन में गुंजल ने एक अंतरराष्ट्रीय विवादित “एपिस्टिन फाइल” का भी जिक्र किया और कहा कि जब अन्य देशों के नेताओं के नाम इस फाइल में सामने आए तो वहां सवाल उठे और कई नेताओं को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भारत के कुछ नेताओं के नाम इस मामले में सामने आए तो सरकार और भाजपा नेतृत्व चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी है तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

गुंजल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कोटा शहर पहले ही कोचिंग उद्योग में आई गिरावट से जूझ रहा है। शहर में कोचिंग पढ़ने आने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है और जो छात्र यहां रह रहे हैं उन्हें भी खाने-पीने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कई होटल, हॉस्टल और मैस बंद हो रहे हैं, जिससे छात्रों को भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कम से कम होटल और मैस संचालकों को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं ताकि कोचिंग छात्रों को दो वक्त का खाना मिल सके। गुंजल ने कहा कि कोटा की कोचिंग इंडस्ट्री को बचाने में सरकार विफल रही है और अब यहां के छोटे व्यवसाय भी संकट में हैं।

अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि कोटा में एक बड़ा उद्योग आने वाला था, लेकिन स्थानीय नेताओं द्वारा उसमें 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग करने के कारण वह उद्योग किसी अन्य राज्य में चला गया। उन्होंने कहा कि इससे कोटा के युवाओं को रोजगार मिलने का अवसर भी खत्म हो गया।

प्रहलाद गुंजल ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि देश की स्थिति चिंताजनक है और अब बदलाव के लिए आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “आंदोलन की मशाल, बदलाव की मशाल” लेकर युवाओं को आगे आना होगा और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को जवाबदेह बनाना होगा।

प्रदर्शन के दौरान कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया। बूंदी जिला कांग्रेस अध्यक्ष महावीर मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने भाषणों में नालों से गैस बनाने की बात करते हैं, लेकिन जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने ऐसा करने की कोशिश की तो सच्चाई सामने आ गई। उन्होंने कहा कि सरकार को गैस की किल्लत के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

विपिन बरथूनिया ने कहा कि यह आंदोलन केवल कोटा शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि हाड़ौती क्षेत्र और पूरे राजस्थान की जनता की आवाज है। उन्होंने कहा कि गैस की बढ़ती कीमतों और कमी के कारण आम आदमी का जीवन मुश्किल हो गया है।

पूर्व देहात कांग्रेस अध्यक्ष सरोज मीणा ने भाजपा सरकार पर सरकारी संस्थानों के निजीकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपकर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है।

हेमंत चतुर्वेदी ने भी गैस की कीमतों को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले जब गैस सिलेंडर की कीमतों में मामूली वृद्धि होती थी तो भाजपा नेता सड़क पर उतरकर विरोध करते थे, लेकिन आज जब गैस सिलेंडर की कीमत हजार रुपये से अधिक हो गई है तो वही नेता चुप हैं।

सभा को क्रांति तिवारी, अनूप ठाकुर, मंजूर तंवर, राजू पहाड़या, राजीव आचार्य और दूबे सहित कई अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।

प्रदर्शन के दौरान प्रहलाद गुंजल ने कोटा की 18 कॉलोनियों की सीलिंग का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने मंच से जिला प्रशासन और कलेक्टर को चेतावनी देते हुए कहा कि ग्राम थेगड़ा में स्थित एक कॉलोनी को अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद सीलिंग से मुक्त कर दिया गया, जबकि अन्य कॉलोनियों पर सीलिंग नोट बरकरार रखा गया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक धांधली बताते हुए कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस मामले में जानकारी के अनुसार, यह विवादित जमीन कोटा के पूर्व शासक महाराव भीम सिंह से संबंधित संपत्तियों से जुड़ा है। आजादी के बाद जब कृषि सीलिंग कानून लागू हुआ तो अतिरिक्त कृषि भूमि पर मुकदमे दर्ज किए गए। उसी क्रम में महाराव भीम सिंह की जमीनों पर भी प्रकरण दर्ज हुए, जो आज भी विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

राजस्थान सरकार ने 1963 में एक कानून पारित किया था, जिसके तहत रियासतों की जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया तय की गई। इस कानून के तहत 1964 की एक तिथि निर्धारित की गई थी। बाद में 1975 में इसमें संशोधन हुआ, लेकिन मूल तिथि बरकरार रही। इस कानून के खिलाफ महाराव भीम सिंह ने राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

वर्ष 2017 और 2018 में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा इन जमीनों से जुड़े मामलों में स्थगन आदेश जारी किए गए, जो अभी भी प्रभावी हैं। इसके बावजूद जुलाई 2025 में जिला कलेक्टर की एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर थेगड़ा की लगभग 100 बीघा जमीन को सीलिंग से मुक्त घोषित कर दिया गया और विकास प्राधिकरण द्वारा जल्दबाजी में पट्टे भी जारी कर दिए गए।

सूत्रों के अनुसार, इस जमीन की बाजार कीमत लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। इस भूमि पर वर्तमान में तेजी से निर्माण कार्य भी चल रहा है। बताया जा रहा है कि यहां बनने वाली कॉलोनी का नाम पहले “रिद्धी सिद्धी ग्रीन” था, जिसे बाद में बदल दिया गया।

इस मामले को लेकर कई कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं। प्रमुख सवाल यह है कि जिन जमीनों पर पिछले 50 वर्षों से मुकदमे चल रहे हैं और न्यायालय का स्थगन आदेश भी लागू है, क्या उन्हें जिला कलेक्टर अपने आदेश से सीलिंग से मुक्त कर सकते हैं। इसके अलावा यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि ये जमीनें सीलिंग के दायरे में नहीं थीं तो सरकार ने इतने वर्षों तक इन पर मुकदमे क्यों चलाए।

इन 18 कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 20 से 25 हजार लोग भी इस विवाद से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इन कॉलोनियों के निवासियों को न तो पट्टे मिल रहे हैं, न ही बैंक से लोन मिल पा रहा है और न ही निर्माण की अनुमति मिल रही है। हालांकि कई स्थानों पर निर्माण कार्य जारी है।

इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया द्वारा कलेक्टर, केडीए सचिव, उपखंड अधिकारी और तहसीलदार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

गैस किल्लत के मुद्दे और जमीन विवाद को लेकर कोटा की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर और बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

कोटा में प्रहलाद गुंजल का जंगी प्रदर्शन, सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान
प्रदर्शन के दौरान प्रहलाद गुंजल व कांग्रेसजन । जननायक संवाददाता
कोटा। शहर में गैस की किल्लत और कालाबाजारी के विरोध में बुधवार को कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल के नेतृत्व में जिला कलेक्ट्रेट
पर जंगी प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल ने प्रदर्शन के दौरान केंद्र की मोदी सरकार को खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आम जनता को घर का चूल्हा जलाने के लिए 25 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। व्यावसायिक सिलेंडर की सप्लाई बंद होने से गैस संबंधित 50 प्रतिशत व्यवसाय बंद होने की कगार पर हैं। आमजन एवं व्यापारी गैस की आपूर्ति को सामान्य करने की मांग कर रहे है। दूसरी ओर सरकार कहती है कोई संकट नहीं है। भाजपा के अंध भक्त नेता लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। यदि कोई संकट नहीं है तो सरकार आगे आकर एडवाइजरी जारी क्यों नहीं करती। पीएम मोदी ने अमेरिका के सामने घुटने टेके हैं। ट्रेड डील में गैस और पेट्रोल खरीदने का जो मसौदा सरकार ने तैयार किया है वह भारत को बीमित व ट्रांसपोर्टेशन में 8 से 10 गुना महंगा पड़ने वाला है। पहले ही सिलेंडर पर 60 रूपये बढ़ा चुके हैं। आने वाले समय में सिलेंडर की दर 105 रुपए और बढ़ाने वाले हैं। एपिस्टिन फाइल पर मौन क्यों सरकार गुंजल ने कहा कि दुनिया के दूसरे राष्ट्रध्यक्ष, राजदूत व नेताओं का एपिस्टिन फाइल में नाम आया तो उनके देश में सवाल खड़े हो गए और उन्हें इस्तीफे देने पड़े और जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, हरदीप पुरी और दिया कुमारी का नाम आया है सरकार व भारतीय जनता पार्टी का
नेतृत्व मोनी बाबा बन गया है। क्या आप गुनहगार हो यदि आप गुनहगार हो तो गुनहगारों को भारत के शासन में रहने का क्षण भर भी अधिकार नहीं है। कोचिंग के बच्चे हो रहे परेशान
गुंजल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर जमकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक सिलेंडर नहीं मिलने से शहर की होटलें व मैस बंद हो रही हैं। पहले ही कोटा में कोचिंग के बच्चे नहीं हैं। जो हैं उन्हें भी खाने के लिए भटकना पड़ रहा है। जनता आपसे त्रस्त है, जनता ने आपसे मुंह मोड़ लिया है। हवाई जहाज तो जब उड़ेगा जब उड़ जाएगा। कोटा की कोचिंग तो नहीं बचा पाए, होटल हॉस्टल एवं मैस वालों को सिलेंडर उपलब्ध करवा दो ताकि बचे खुचे बच्चों को तो दो वक्त की रोटी मिल जाए।
उन्होंने कहा कि पहले कोचिंग वालों से पार्टनरी मांगी गई जब कोचिंग निपट गई तो एक बड़ा कारखाना कोटा में आने वाला था पर जब उससे भी यहां के नेताओं ने 50 प्रतिशत की पार्टनरी मांगी तो वह भी
किसी दूसरे राज्य में चला गया। अखबारों में छपने और कोरी बयानबाजी करने के अलावा आपके पास संवेदनाएं नहीं हैं। हाथ में मशाल लेकर आंदोलन की जरूरत
गुंजल ने युवाओं से आव्हान करते हुए कहा कि आज देश गलत हाथों में चला गया है। अंध भक्तों की टोली एक व्यक्ति को शक्तिशाली बनाने में लगी है। भाजपा के पाप का घड़ा भर चुका है। ऐसी गुनाहगार सत्ता को उखाड़ फैकने के लिए
'आंदोलन की मशाल, बदलाव की मशाल' हाथ में लेकर निकलना पड़ेगा।
इन नेताओं ने भी किया सम्बोधित
प्रदर्शन के दौरान बूंदी जिला अध्यक्ष महावीर मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में नाले से गैस बनाने की बात करते है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रयास किया तो इसकी पोल खुल गई। गैस की किल्लत पर भी सरकार का सच सामने आना चाहिए।
विपिन बरथूनिया ने कहा कि यह प्रदर्शन कोटा की जनता का नहीं हाड़ौती और पूरे राजस्थान का है। पूर्व देहात अध्यक्ष सरोज मीणा ने कहा कि भाजपा की सरकार ने सत्ता में आने के बाद सरकारी संस्थाओं का निजीकरण कर धनाढ्य वर्ग अड़ानी अंबानी को लाभ देने का काम किया।
के दाम 400 रूपये से थोड़ा बढ़ने हेमंत चतुर्वेदी ने कहा कि गैस पर स्मृती ईरानी सड़को पर उतर गई थी। आज गैस के दाम 1 हजार पार हो गए हैं। आज वह कहा गई। इनके अलावा सभा को क्रांति तिवारी, अनूप ठाकुर, मंजूर तंवर, राजू पहाड़यां, राजीव आचार्य एवं दूबे ने भी संबोधित किया। विरोध की तख्तियां और उग्र प्रदर्शन
इससे पहले प्रहलाद गुंजल नयापुरा कार्यालय से कार्यकर्ताओं के साथ रैली के रूप में कलैक्ट्रेट के लिए रवाना हुए। कार्यकर्ता हाथों में गैस सिलेंडर की तख्तियां, झंडे बैनर लिए सरकार विरोधी नारे लगाते हुए रैली में शामिल हुए।
गुंजल ने सीलिंग से संबंधित 18 कॉलोनियों का उठाया मुद्दा
मंच से सीधे दी कलक्टर एवं प्रशासन को चेतावनी
जननायक संवाददाता
कोटा। कांग्रेस नेता और कोटा उत्तर के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान कोटा की 18 कॉलोनियों के सीलिंग का मुद्दा जोर शोर से उठाया। उन्होंने मंच से सीधे कलक्टर एवं प्रशासन को चेतावनी दी कि एक कॉलोनी जो कि ग्राम थेगड़ा में स्थित है उसकी भूमि पर बनी कॉलोनी को स्टे के बावजूद सीलिंग से रिलीज कर दिया और बाकी कॉलोनियों पर सीलिंग का नोट बरकरार रखा है। यह धांधली नहीं चलने दी जाएगी।
गुंजल के द्वारा 18 कॉलोनियों के सीलिंग प्रकरण को उठाने के मामले में जननायक ने पड़ताल की और तथ्य जुटाए। पड़ताल के अनुसार देश की आजादी के वक्त महाराव भीम सिंह कोटा के अंतिम शासक थे। राजस्थान का गठन जिन रियासतों को मिलाकर किया गया उनमें कोटा रियासत भी शामिल थी। रियासतों के विलीनीकरण के समय हर एस्टेट की तरह कोटा एस्टेट की भी कोटा के राजा की पर्सनल प्रापर्टी इंवेंट्री बनाई गई जिसे भारत सरकार ने मान्यता दी। देश की आजादी के बाद भारत में कृषि सिलिंग एक्ट लागू हुआ। इसके तहत जिस व्यक्ति के पास सीमा से अधिक कृषि भूमि थी उन सभी भूमियों पर सीलिंग एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज हुआ। जिसके तहत तत्कालीन शासक महाराव भीम सिंह की भूमियों पर भी प्रकरण दर्ज हुए। जो आज भी उप जिला विचाराधीन हैं। कलक्टर कोटा के न्यायालय में
राजस्थान के राजाओं के मामले में राजस्थान सरकार के द्वारा एक कानून पास किया गया। जिसको राजस्थान लैंण्ड रिफोर्म एण्ड एक्यूजेशन ऑफ लैण्ड आनर्स एस्टेट 1963 एक्ट नंबर 11 ऑफ 1969 एक्ट से संबोधित किया। उस एक्ट के तहत भूमियों को अधिगृहित करने हेतु एक सिंतबर 1964 की तारीख निश्चित की गई। तत्पश्चात 1975 में एक्ट में संशोधन किया गया। परंतु सितंबर 1964 की तारीख को बरकरार रखा। इस एक्ट से नाराज होकर महाराव भीम सिंह के द्वारा एक रिट याचिका 1975 में राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर की। न्यायालय के द्वारा वर्ष 1985 में निर्देश प्रदान
अरबों रुपए की जमीनों का है मामला
ग्राम थेगडा की वह भूमि जो विवादित है व उस पर जारी निर्माण कार्य । कुछ समय किए कि आदेश के दो माह के अंदर प्रार्थी क्षतिपूर्ति आयुक्त (संभागीय आयुक्त) को आपत्तियां प्रस्तुत करें। इस एक्ट की धारा दस के तहत महाराव भीमसिंह के द्वारा आपत्तियां प्रस्तुत की गईं। जिसके तहत आपत्तियों का जवाब कोटा कलेक्टर द्वारा वर्ष 85 में ही दिया गया। उसके बाद राज्य सरकार के द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से इस एक्ट के तहत एक रेफरेंस फाइल किया।
उस रेफरेंस में महाराव भीमसिंह से जिन्होंने भी जमीन खरीदी थी उनको भी सरकार ने पक्षकार बनाया। जिसके तहत राजस्व मंडल अजमेर के द्वारा दिए गए आदेश के तहत 11 अगस्त 1997 को संभागीय आयुक्त कोटा के द्वारा इस प्रकरण पर फैसला दिया गया। जिसकी अपील राज्य सरकार के द्वारा राजस्व मंडल अजमेर में की गई। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार एवं पूर्व
एसीबी तक भी पहुंचा था प्रकरण
कोटा में 22 जुलाई 2014 को राजस्थान राजस्व मंडल अजमेर के निर्णय की | आड में कई जमीनों की खरीद फरोख्त रातों रात हुई। इसमें कोटा एस्टेट में नाता बाग के नाम से चर्चित जमीनों की रजिस्ट्री रातों रात हुई । तत्कालीन वसुधरा राजे सरकार के संज्ञान में मामला आने के बाद 14 अगस्त 2014 को महाराव भीम सिंह की समस्त जमीनों पर बेचान और अंतरण, भेंट एवं दान पर जिला कलेक्टर ने रोक लगाई। जिससे संबंधित तहसीलदार एवं पटवारी ने आदेश की पालना करते हुए राजस्व रिकार्ड में नोट अंकित किया एवं पक्षकारों को भी पाबंद किया। जिसके तहत राजस्व मंडल अजमेर के द्वारा भी इन जमीनों की रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी एवं म्यूटीशन खोलने वाले अधिकारियों की भी जांच शुरू की। स्टे के दौरान पूर्व राज परविार के इज्यराज सिंह के द्वारा 17 सितंबर 2021 को तीन रजिस्ट्रियां ग्राम थेगड़ा तहसील लाडपुरा में सुनीता सुवालका पत्नी नीरज सुवालका एवं मनसिका सुवालका पुत्री नीरज सुवालका के नाम कराई गई। जब यह प्रकरण तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार संज्ञान में आया तो तुरंत 28 अप्रेल 2022 को 14 अगस्त 2014 | के कलक्टर के आदेश के क्रम में पुनः कलक्टर कोटा ने इन जमीनों के विक्रय पर रोक और साथ ही इन भूमियों पर यूआईटी के द्वारा पट्टे पर रोक लगाई एवं सरकार
जांच के आदेश दिए। यह प्रकरण एसीबी तक भी पहुंचा। उल्लेखनीय है कि थेगड़ा की 103 बीघा जमीन की बाजार कीमत 150 से 200 करोड़ रुपए है।
पहले यहां आम का बगीचा था। महाराव ब्रजराज सिंह तथा महाराव भीमसिंह की पुत्रियों इंदिरा कुमारी एवं भुवनेश्वरी कुमारी के द्वारा अलग अलग याचिका पेश कर राजस्थान राजस्व मंडल अजमेर के फैसले को चुनौती दी। जिसमें राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा 30 जनवरी 2017 एवं 9 जनवरी 2018 को स्थगन आदेश जारी किया। 30 जनवरी 2017 का स्थगन आदेश आज भी प्रभावी है।
न्यायालयों में विचाराधीन हैं प्रकरण
इन भूमियों से संबंधित प्रकरण अलग अलग न्यायालय में विचाराधीन हैं। जिनमें स्थगन आदेश चल रहे हैं। लेकिन स्थगन आदेश के बावजूद जिला कलक्टर कोटा ने जुलाई 2025 में एक कमेटी की रिपोर्ट के तहत थेगड़ा की जो 103 बीघा भूमि सुनीता सुवालका एवं मनसिका सुवालका के नाम रजिस्ट्री कराई थी उसमें से 100 बीघा भूमि को सीलिंग से मुक्त बताकर आदेश प्रदान कर दिया। जिसके तहत केडीए ने आनन फानन में पट्टे जारी कर दिए। अभी हाल ही में महाराव भीमसिंह से संबंधित पारिवारिक प्रकरण में भी राजस्थान उच्च न्यायालय के द्वारा 13 फरवरी 2026 में भी स्थगन आदेश प्रदान किया है। जिस आदेश की क्रियान्विती के लिए जिला कलेक्टर के द्वारा भी 19 फरवरी 2026 को सचिव केडीए, उपखंड अधिकारी कोटा एवं तहसीलदार कोटा को आदेश प्रदान किया। वर्तमान में थेगड़ा में स्थित इस भूमि पर निर्माण कार्य तेज गति से कराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस कॉलोनी का नाम रिद्धी सिद्धी ग्रीन था जिसे बदल दिया है।
प्रश्न जो जवाब मांगते हैं.....
जिला कलक्टर, केडीए सचिव, उपखण्ड अधिकारी लाडपुरा व तहसीलदार लाडपुरा को कई बार फोन व मैसेज भी किए परन्तु किसी भी अधिकारी ने किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नही दी।
जिन भूमियों पर 50 साल से मुकदमें चल रहे हैं और स्टे है उन भूमियों के बारे में क्या जिला कलक्टर अपने आदेश से रिलीज कर सकता है। महत्वपूर्ण बिंदू यह है कि तत्कालीन जिला कलेक्टर ने इन भूमियों को सीलिंग एक्ट के तहत अधिग्रहण करने का रेफरेंस राजस्व मंडल अजमेर में पेश किया था।
 यदि यह जमीन सीलिंग में नहीं थी तो सरकार ने 50 साल मुकदमें क्यों
चलाए ।
 सभी 18 कॉलोनियों पर सीलिंग का ही प्रकरण है। एक ही तरह का नोट अंकित है तो कोटा कलेक्टर तथा अधिकारियों ने सभी कॉलोनियों से नोट क्यों नहीं हटाया और उन्हें राहत क्यों नहीं दी। इन सभी कॉलोनियों में रहने वाले 20 से 25 हजार आदमी प्रभावित हैं। उनको राहत कौन देगा। इन कॉलोनियों में रहने वाले व्यक्तियों को न तो पट्टे दिए जा रहे हैं और न लोन मिल रहा है और न ही निर्माण की स्वीकृति मिल रही है। लेकिन निर्माण अधिकांश में जारी है।
 कानूनी सवाल यह भी उठता है कि इस तरह के प्रकरण को निस्तारित करने के लिए क्या जिला कलेक्टर को राज्य सरकार ने कोई विशेष आदेश प्रदान किया।
सीलिंग एवं अन्य प्रकरण जो इन भूमियों से संबंधित है उसमें स्वयं तहसीलदार लाडपुरा एवं एसडीएम कोटा ओआईसी हैं

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