मिडिल-ईस्ट संकट का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटा

मार्च 12, 2026 - 17:21
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मिडिल-ईस्ट संकट का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटा

मिडिल-ईस्ट संकट का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटा

मुंबई: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों में बढ़ती चिंता और वैश्विक बाजारों में नकारात्मक संकेतों के चलते सेंसेक्स में 900 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के साथ ही बाजार में अस्थिरता और निवेशकों की सतर्कता भी बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक निवेश माहौल पर पड़ा है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे बाजार पर दबाव बनता है।

शेयर बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख सेक्टरों पर देखा गया। बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल और मेटल कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके अलावा एयरलाइंस और परिवहन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव बना रहा, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से इन क्षेत्रों की लागत बढ़ सकती है।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स शुरुआती समय में ही तेजी से नीचे आ गया और दिन भर उतार-चढ़ाव के बीच 900 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं निफ्टी सूचकांक में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे फिसल गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली भी बाजार में कमजोरी का एक बड़ा कारण है।

निवेशकों के बीच इस समय सावधानी का माहौल बना हुआ है। कई निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जैसे कि सोना और सरकारी बॉन्ड। विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर किसी तरह का भू-राजनीतिक संकट बढ़ता है तो शेयर बाजारों में अस्थिरता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस तरह की गिरावट अवसर भी साबित हो सकती है। मजबूत कंपनियों के शेयर कम कीमत पर उपलब्ध होने से निवेशक भविष्य के लिए बेहतर पोर्टफोलियो तैयार कर सकते हैं।

इस बीच बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे घबराहट में कोई बड़ा फैसला न लें और निवेश से पहले पूरी जानकारी और रणनीति के साथ कदम उठाएं। मिडिल-ईस्ट की स्थिति और वैश्विक आर्थिक संकेतों के आधार पर आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय होगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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