आईटी नियमों में बदलाव: AI कंटेंट पर सख्ती

फ़रवरी 11, 2026 - 17:41
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आईटी नियमों में बदलाव: AI कंटेंट पर सख्ती

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए आईटी नियमों को अधिसूचित कर दिया है, जिनका मुख्य उद्देश्य AI-जनित (AI-generated) और डीपफेक सामग्री पर नियंत्रण बढ़ाना है। इन संशोधित नियमों के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI से बनी या बदली गई सामग्री पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि उपयोगकर्ता आसानी से पहचान सकें कि कंटेंट वास्तविक है या कृत्रिम।

नए नियमों के अनुसार, यदि किसी पोस्ट या सामग्री को आपत्तिजनक, अवैध या भ्रामक माना जाता है, तो प्लेटफॉर्म्स को उसे हटाने के लिए अब केवल 3 घंटे का समय मिलेगा। इससे पहले यह समयसीमा लगभग 36 घंटे तक थी। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य डीपफेक, फर्जी जानकारी और ऑनलाइन दुरुपयोग पर तेजी से रोक लगाना है।

संशोधित आईटी नियमों के तहत पहली बार “सिंथेटिक कंटेंट” या AI-जनित सामग्री को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें डीपफेक वीडियो, कृत्रिम ऑडियो, बदली हुई तस्वीरें और ऐसी कोई भी सामग्री शामिल है, जिसे कंप्यूटर तकनीक के जरिए वास्तविक जैसा बनाया गया हो। हालांकि सामान्य संपादन, जैसे रंग सुधार या संपीड़न, को इस श्रेणी में नहीं रखा गया है।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स उपयोगकर्ताओं से यह घोषणा लें कि उनकी अपलोड की गई सामग्री AI-जनित है या नहीं। प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट की पहचान और सत्यापन के लिए तकनीकी उपकरण भी लागू करने होंगे। यदि कोई AI सामग्री बिना लेबल के पाई जाती है, तो प्लेटफॉर्म को उसे लेबल करना या आवश्यक होने पर हटाना पड़ेगा।

नियमों में यह भी कहा गया है कि AI-जनित सामग्री पर लगाए गए लेबल या मेटाडाटा को हटाया या छिपाया नहीं जा सकेगा। इससे सामग्री की ट्रेसबिलिटी बढ़ेगी और उसके स्रोत का पता लगाना आसान होगा।

सरकार का दावा है कि ये बदलाव ऑनलाइन सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किए गए हैं, खासकर डीपफेक और भ्रामक सामग्री के बढ़ते खतरे को देखते हुए। हालांकि, कुछ डिजिटल अधिकार विशेषज्ञों ने इतनी कम समयसीमा पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे प्लेटफॉर्म्स को सामग्री की कानूनी जांच के बिना ही उसे हटाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होने वाले हैं और इनके बाद सोशल मीडिया कंपनियों पर अनुपालन की जिम्मेदारी और कड़ी हो जाएगी।

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