कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 4 यूनिटों पर संकट: 2030 तक चरणबद्ध बंदी का प्रस्ताव, पर्यावरण स्वीकृति बनी निर्णायक

मार्च 27, 2026 - 18:31
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कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 4 यूनिटों पर संकट: 2030 तक चरणबद्ध बंदी का प्रस्ताव, पर्यावरण स्वीकृति बनी निर्णायक

Kota

कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 4 यूनिटों पर संकट: 2030 तक चरणबद्ध बंदी का प्रस्ताव, पर्यावरण स्वीकृति बनी निर्णायक

कोटा। राजस्थान के प्रमुख बिजली उत्पादन केंद्रों में शामिल कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की चार पुरानी यूनिटों को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। विद्युत उत्पादन निगम की 25 मार्च को हुई बोर्ड बैठक में यूनिट 1 से 4 को चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2030 तक बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव कोई नया नहीं है बल्कि दिसंबर 2019 में हुई बोर्ड की 293वीं बैठक के निर्णय का ही विस्तार है। उस समय भी इन यूनिटों को धीरे-धीरे बंद करने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। अब चूंकि इन इकाइयों की आयु 35 से 40 वर्ष के बीच पहुंच चुकी है, इसलिए इनके संचालन को लेकर तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियां सामने आ रही हैं।

कोटा थर्मल पावर स्टेशन की कुल 7 यूनिटों की उत्पादन क्षमता 1240 मेगावाट है। इनमें से यूनिट 1 और 2 की क्षमता 110-110 मेगावाट तथा यूनिट 3 और 4 की क्षमता 210-210 मेगावाट है। इस प्रकार पहली चार यूनिटों की कुल क्षमता 640 मेगावाट होती है। ये इकाइयां लंबे समय से उत्तरी ग्रिड को बिजली आपूर्ति कर रही हैं, जिससे राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों को भी लाभ मिलता है।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बोर्ड बैठक में इस विषय पर गंभीरता से विचार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वर्ष 2030 के बाद इन इकाइयों को पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलती है, तो इन्हें बंद करना अनिवार्य हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी थर्मल यूनिट का सामान्य कार्यकाल लगभग 25 वर्ष होता है, लेकिन यदि तकनीकी रूप से वह इकाई सक्षम हो, तो उसे आगे भी चलाया जा सकता है—बशर्ते पर्यावरण से संबंधित सभी मानकों का पालन हो।

दरअसल, पुरानी थर्मल इकाइयों के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कोटा शहर के बीच स्थित इस पावर प्लांट के लिए भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण सरकार पहले से ही संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रही है।

हालांकि, प्लांट प्रशासन स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। कोटा थर्मल की चीफ इंजीनियर शिखा अग्रवाल ने कहा कि बोर्ड स्तर पर लिए गए निर्णय कॉरपोरेट स्तर के होते हैं और उनके पास अभी तक इस संबंध में कोई निर्देश नहीं आया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्लांट में फिलहाल नियमित मेंटेनेंस और अपडेशन का कार्य जारी है।

कोटा थर्मल की सातों यूनिट में उत्पादन हुआ बंद, अंधेरे में डूबे कोटा, बूंदी  सहित अन्य जिले - all units stoped of Kota Thermal

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इन यूनिटों को बंद करने की चर्चा सामने आई है। करीब पांच साल पहले भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने यूनिट 1 और 2 को बंद करने का निर्णय लिया था। हालांकि, स्थानीय विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते उस समय यह निर्णय टाल दिया गया था। तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने यह घोषणा की थी कि 31 दिसंबर 2022 तक इन इकाइयों को बंद नहीं किया जाएगा, क्योंकि उस समय तक इनके पास पर्यावरण स्वीकृति उपलब्ध थी।

अब एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है, जिससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र बल्कि स्थानीय रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजस्थान विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ, थर्मल इकाई कोटा के अध्यक्ष राम सिंह शेखावत ने इस प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि ये चारों यूनिटें बंद होती हैं, तो करीब 1000 ठेका श्रमिकों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा।

उन्होंने सरकार से अपील की है कि इन इकाइयों को पूरी तरह बंद करने के बजाय आधुनिक तकनीक का उपयोग कर इन्हें अपग्रेड किया जाए। उनके अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई तकनीकें अपनाकर इन यूनिटों को लंबे समय तक चलाया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार इन यूनिटों को बंद करने का निर्णय लेती है, तो उसी भूमि पर सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा सकती है, जिससे श्रमिकों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक ओर जहां पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट पर्यावरणीय दबावों के कारण सीमित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार हो रहा है। ऐसे में कोटा थर्मल पावर स्टेशन का भविष्य भी इसी परिवर्तन से प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें राज्य सरकार के अंतिम निर्णय और पर्यावरण स्वीकृति पर टिकी हुई हैं। यदि अनुमति मिलती है, तो ये यूनिटें कुछ और वर्षों तक चल सकती हैं, अन्यथा 2030 तक इनका इतिहास बनना तय माना जा रहा है।

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