कोटा में ई-बस सेवा शुरू होने में एक महीने की देरी: जून के पहले सप्ताह में आएंगी 40 बसें, तैयारियों को अंतिम रूप

मई 5, 2026 - 15:34
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कोटा में ई-बस सेवा शुरू होने में एक महीने की देरी: जून के पहले सप्ताह में आएंगी 40 बसें, तैयारियों को अंतिम रूप

कोटा में ई-बस सेवा शुरू होने में एक महीने की देरी: जून के पहले सप्ताह में आएंगी 40 बसें, तैयारियों को अंतिम रूप

कोटा। स्मार्ट और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत कोटा शहर में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन अब एक महीने की देरी से शुरू होगा। पहले जहां उम्मीद की जा रही थी कि अप्रैल के अंत तक ई-बसें सड़कों पर दौड़ने लगेंगी, वहीं अब ताजा स्थिति के अनुसार जून के पहले सप्ताह में इन बसों के आने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियों के अंतिम चरण में होने के कारण इस परियोजना में समय लग रहा है।

शहर में ई-बस संचालन के लिए सुभाष नगर में विकसित किए जा रहे मुख्य ई-बस डिपो और स्टॉप का काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार यहां करीब 95 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। इस डिपो को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां एक साथ 100 इलेक्ट्रिक बसों को खड़ा किया जा सके। प्लेटफॉर्म का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और अब शेष बचे कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।

मंगलवार को जिला कलेक्टर पीयूष समारिया और नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष कार्य तय समयसीमा में पूरे किए जाएं। निरीक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्माण कार्य में हाल के दिनों में तेजी आई है, जिससे परियोजना को गति मिली है।

नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले 15 अप्रैल तक अधिकांश कार्य पूरा करने और 30 अप्रैल तक पूरे प्रोजेक्ट को समाप्त करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि कुछ तकनीकी और संरचनात्मक कार्यों के कारण समयसीमा बढ़ानी पड़ी। उन्होंने बताया कि अब चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है, जिसे 25 मई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए मजबूत और विश्वसनीय चार्जिंग नेटवर्क जरूरी है। इसी के तहत डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं, जहां एक साथ कई बसों को चार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर लगाने का कार्य भी प्रगति पर है, जो अगले सात से आठ दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।

डिपो के सिविल कार्यों की बात करें तो प्रशासनिक भवन, पार्किंग क्षेत्र, बस स्टैंड प्लेटफॉर्म और अन्य बुनियादी सुविधाएं लगभग तैयार हो चुकी हैं। यहां कर्मचारियों के लिए ऑफिस, कंट्रोल रूम और अन्य सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर प्रतीक्षालय और सूचना प्रणाली भी तैयार की जा रही है।

हालांकि अभी वर्कशॉप और जीएसएस (ग्रिड सब स्टेशन) का कार्य जारी है। वर्कशॉप में बसों की मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था होगी, जबकि जीएसएस से पूरे डिपो को बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इन दोनों कार्यों के पूरा होने के बाद ही ई-बस संचालन को पूरी तरह से शुरू किया जा सकेगा।

राज्य सरकार की ओर से जून के पहले सप्ताह में बसों की पहली खेप आने की संभावना जताई गई है। पहले चरण में कोटा को 40 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। इन बसों के लिए शहर में विभिन्न रूट पहले ही तय किए जा चुके हैं। रूट निर्धारण में यात्रियों की संख्या, ट्रैफिक पैटर्न और शहर के प्रमुख इलाकों को ध्यान में रखा गया है।

ई-बसों के संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। इसके लिए नगर निगम द्वारा टेंडर जारी किए जा रहे हैं। ड्राइवर, कंडक्टर, तकनीकी स्टाफ और प्रबंधन से जुड़े अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति इस प्रक्रिया के तहत की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षित और कुशल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी इस परियोजना की सफलता के लिए जरूरी है।

ई-बस सेवा के शुरू होने से कोटा शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यात्रियों को आरामदायक और आधुनिक यात्रा का अनुभव भी मिलेगा। इलेक्ट्रिक बसें पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में अधिक शांत, पर्यावरण अनुकूल और किफायती होती हैं।

कोटा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में ई-बस सेवा का शुरू होना शहरी परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह पहल शहर को स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ाने में भी मदद करेगी। इसके साथ ही यह अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करेगी कि किस तरह आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाया जा सकता है।

हालांकि परियोजना में हुई देरी को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में समयसीमा का पालन करना एक बड़ी चुनौती होती है, खासकर तब जब इसमें कई विभागों और तकनीकी प्रक्रियाओं का समन्वय शामिल हो। फिर भी प्रशासन का कहना है कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना कार्य को पूरा करना उनकी प्राथमिकता है।

स्थानीय नागरिकों में भी ई-बस सेवा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग इसे शहर की ट्रैफिक और प्रदूषण समस्या के समाधान के रूप में देख रहे हैं। छात्रों, कामकाजी लोगों और बुजुर्गों के लिए यह सेवा काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

आने वाले समय में यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो कोटा में ई-बसों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही शहर के और अधिक क्षेत्रों को इस सेवा से जोड़ा जाएगा। सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाए।

फिलहाल सभी की नजरें जून के पहले सप्ताह पर टिकी हैं, जब कोटा की सड़कों पर पहली बार इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह शहर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा और स्वच्छ, हरित और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

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