कोटा में NEET परीक्षा के दबाव में छात्र ने की आत्महत्या की कोशिश, समय रहते बचाई गई जान
कोटा में NEET परीक्षा के दबाव में छात्र ने की आत्महत्या की कोशिश, समय रहते बचाई गई जान
कोटा। देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव के बीच कोटा से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक छात्र ने परीक्षा खराब होने के बाद तनाव में आकर आत्महत्या की कोशिश की। छात्र ने करीब 20 नींद की गोलियां खा लीं, लेकिन समय रहते मकान मालिक की सतर्कता से उसकी जान बचा ली गई।
यह घटना कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के लैंडमार्क इलाके की है, जहां छात्र एक पीजी में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। छात्र मूल रूप से दौसा जिले का निवासी है और कोटा में एक निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ाई कर रहा था।
जानकारी के अनुसार, रविवार को आयोजित NEET परीक्षा छात्र की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं गई। परीक्षा के बाद से ही वह मानसिक रूप से काफी परेशान और तनावग्रस्त था। अगले ही दिन, सोमवार को उसने यह खतरनाक कदम उठाते हुए बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां खा लीं।
मकान मालिक को जब छात्र की स्थिति पर संदेह हुआ तो उन्होंने तुरंत कमरे की जांच की। स्थिति गंभीर लगने पर बिना देरी किए छात्र को कोटा के एमबीएस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। फिलहाल छात्र की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह खतरे से बाहर है।
घटना की सूचना मिलते ही छात्र के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। छात्र के पिता ने बताया कि उनका बेटा लंबे समय से कोटा में रहकर पढ़ाई कर रहा था और परीक्षा को लेकर काफी मेहनत कर रहा था। परीक्षा उम्मीद के मुताबिक नहीं होने से वह मानसिक रूप से टूट गया था।
कुन्हाड़ी थाना अधिकारी देवेश भारद्वाज ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर छात्र के बयान लिए गए। प्रारंभिक बयान में छात्र ने कहा कि उसे नींद नहीं आ रही थी, इसलिए उसने नींद की गोलियां खा लीं। हालांकि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
यह घटना एक बार फिर कोटा में कोचिंग छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के दुष्प्रभाव को उजागर करती है। हर साल हजारों छात्र देशभर से कोटा आते हैं, जहां वे मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में कई छात्र मानसिक तनाव, अकेलेपन और असफलता के डर से जूझते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए न केवल छात्रों, बल्कि अभिभावकों और कोचिंग संस्थानों को भी संवेदनशीलता दिखानी होगी। छात्रों को यह समझाना जरूरी है कि एक परीक्षा जीवन का अंतिम सत्य नहीं होती और असफलता भी सीखने का हिस्सा है।
कोटा प्रशासन और विभिन्न संस्थाएं समय-समय पर छात्रों के लिए काउंसलिंग और हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। जरूरत है कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए और छात्रों को भावनात्मक समर्थन प्रदान किया जाए।
यह घटना सभी के लिए एक चेतावनी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना कि पढ़ाई करना। समय रहते सहायता मिलना इस छात्र के लिए जीवनदायक साबित हुआ, लेकिन हर मामले में ऐसा संभव नहीं होता।
यदि कोई छात्र या व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो उसे तुरंत अपने परिवार, दोस्तों या विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी का संकेत है।
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