प्रयागराज में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम: बोले- “रील 21वीं सदी का नशा”, 1,000 युवाओं में सिर्फ 12 को स्थायी नौकरी का दावा

अगस्त 8, 2026 - 21:31
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प्रयागराज में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम: बोले- “रील 21वीं सदी का नशा”, 1,000 युवाओं में सिर्फ 12 को स्थायी नौकरी का दावा

प्रयागराज में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम: बोले- “रील 21वीं सदी का नशा”, 1,000 युवाओं में सिर्फ 12 को स्थायी नौकरी का दावा

प्रयागराज | 8 अगस्त 2026 | विशेष रिपोर्ट

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, AI और रोजगार के बदलते स्वरूप को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखे सवाल उठाए। करीब 47 मिनट के संवाद में राहुल गांधी ने मंच से कई छात्रों से सीधे बातचीत की और उनकी शिक्षा, नौकरी, परीक्षा और आंदोलन से जुड़ी परेशानियों को सुना।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं की बेरोजगारी को केवल नौकरी की कमी का विषय नहीं, बल्कि पूरे आर्थिक और सामाजिक ढांचे से जुड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि आज युवाओं को महंगी शिक्षा के बाद डिग्री तो मिल रही है, लेकिन डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं दे रही।

उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा सोशल मीडिया और रील्स को लेकर रहा। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को लगातार मनोरंजन और short-form content में उलझाए रखना 21वीं सदी के एक नए प्रकार के नशे जैसा है। उन्होंने कहा कि युवाओं से कहा जा रहा है कि जितनी रील बनानी है बनाओ, जितनी रील देखनी है देखो, delivery और gig economy में काम करो, लेकिन स्थायी नौकरी का रास्ता बंद है।

राहुल गांधी ने दावा किया कि 1,000 युवाओं में केवल 12 युवाओं को स्थायी नौकरी मिल रही है। उन्होंने इस आंकड़े के आधार पर सवाल उठाया कि अगर देश का युवा बड़ी संख्या में शिक्षा प्राप्त कर रहा है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है और डिग्री हासिल कर रहा है, तो उसके लिए पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण और स्थायी रोजगार क्यों उपलब्ध नहीं हैं।

“सिस्टम ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा दिया”

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में बार-बार ‘चक्रव्यूह’ शब्द का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि युवा शिक्षा, परीक्षा, बेरोजगारी और अस्थायी रोजगार के एक ऐसे चक्र में फंस गए हैं, जिसमें वे वर्षों तक मेहनत करने के बावजूद स्थायी नौकरी तक नहीं पहुंच पाते।

उन्होंने कहा कि परिवार अपनी बचत खर्च करके बच्चों को BA, MA, B.Ed और अन्य डिग्रियां दिलाते हैं। इसके बाद युवा सरकारी और निजी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लेकिन पेपर लीक, परीक्षा में देरी, भर्ती प्रक्रिया और सीमित vacancies जैसी समस्याओं के कारण उनका समय लगातार निकलता जाता है।

राहुल गांधी ने कहा कि युवा कई वर्षों तक परीक्षा का इंतजार करते हैं और उम्मीद करते हैं कि अगले कुछ वर्षों में नौकरी मिल जाएगी। उनके अनुसार, यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि लाखों परिवारों की समस्या है।

उन्होंने छात्रों से कहा कि उनकी आवाज दबनी नहीं चाहिए और उन्हें अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखना चाहिए।

“रील 21वीं सदी का नशा है”

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं और social media के संबंध को लेकर भी अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि 20वीं और 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में डेटा की भूमिका तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार, आज युवाओं की attention और data दोनों बहुत महत्वपूर्ण संसाधन बन चुके हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार और आर्थिक अवसर देने के बजाय उन्हें social media content और reels में व्यस्त रखा जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि वे केवल consumer बनकर न रहें, बल्कि अपने data, skills और knowledge की ताकत को समझें।

उनका तर्क था कि AI systems भी बड़े पैमाने पर data पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं का data और उनकी क्षमता देश की महत्वपूर्ण संपत्ति है और इसे लेकर युवाओं को जागरूक होना चाहिए।

“AI आपके डेटा से बनता है”

राहुल गांधी ने AI को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि आज हर जगह Artificial Intelligence की चर्चा हो रही है, लेकिन AI की वास्तविक शक्ति data में है।

उन्होंने कहा कि “डेटा आपका है और AI आपके डेटा से बनता है।”

राहुल गांधी के अनुसार, AI आने वाले समय में रोजगार के स्वरूप को बदल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि corporate sector में भी entry-level और routine jobs पर automation का प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि केवल traditional degree पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। बदलती technology को समझना और नए skills सीखना जरूरी होगा।

हालांकि, राहुल गांधी ने AI को केवल खतरे के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय data ownership और economic power के संदर्भ में भी चर्चा की। उनका कहना था कि जिस व्यक्ति या संस्था के पास data और technology का नियंत्रण है, उसके पास भविष्य की अर्थव्यवस्था में बड़ी शक्ति होगी।

युवाओं के लिए “पांच दरवाजे” बंद होने का दावा

राहुल गांधी ने रोजगार के अवसरों को पांच प्रमुख क्षेत्रों में बांटते हुए कहा कि युवाओं के लिए पांच दरवाजे थे, लेकिन उनके अनुसार ये सभी कमजोर या बंद हो चुके हैं।

पहला दरवाजा — Manufacturing

राहुल गांधी ने कहा कि भारत को manufacturing powerhouse बनाने की जरूरत है। उन्होंने चीन, वियतनाम और बांग्लादेश के उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों से बड़े पैमाने पर manufactured products दुनिया में पहुंचते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी और GST की गलत implementation ने छोटे कारोबारियों और manufacturing ecosystem को नुकसान पहुंचाया।

उनका कहना था कि छोटे और मध्यम व्यवसाय ही बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं। यदि ये businesses कमजोर होते हैं, तो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी कम होते हैं।

दूसरा दरवाजा — Startups

राहुल गांधी ने Startup India को लेकर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि युवा startup शुरू करना चाहते हैं, लेकिन छोटे entrepreneurs के लिए finance हासिल करना मुश्किल है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े industrial groups को आसानी से बड़े loans और financial resources उपलब्ध होते हैं, जबकि छोटे व्यापारियों और entrepreneurs को banking system से पर्याप्त support नहीं मिलता।

उन्होंने युवाओं से कहा कि entrepreneurship को केवल बड़े शहरों और बड़े investors तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

तीसरा दरवाजा — Government Jobs

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों की समस्याओं को राहुल गांधी ने विशेष रूप से उठाया।

उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में युवा एक limited number of government vacancies के लिए कई वर्षों तक तैयारी करते हैं। उन्होंने परीक्षा में देरी, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता को लेकर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कहा कि युवा केवल नौकरी नहीं मांग रहे, बल्कि एक transparent और reliable recruitment system चाहते हैं।

चौथा दरवाजा — Public Sector

राहुल गांधी ने public sector employment को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में public-sector employment में कमी आई है। उनके अनुसार, privatization के कारण कई traditional employment opportunities कम हुई हैं।

उन्होंने BSNL सहित public-sector institutions का उल्लेख करते हुए कहा कि public sector का उद्देश्य केवल profit नहीं बल्कि employment और strategic public services भी होना चाहिए।

हालांकि, उनके द्वारा दिए गए employment आंकड़े राजनीतिक दावे हैं और इनके स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापन की आवश्यकता है।

पांचवां दरवाजा — Corporate Jobs और AI

राहुल गांधी ने corporate employment को पांचवां दरवाजा बताते हुए कहा कि यहां भी AI और automation तेजी से बदलाव ला रहे हैं।

उनका कहना था कि आने वाले समय में कई routine jobs machines और AI systems द्वारा किए जा सकते हैं। इसलिए सरकार और उद्योगों को युवाओं के लिए नई प्रकार की jobs और skill-development opportunities तैयार करनी होंगी।

उन्होंने कहा कि अगर देश AI revolution में आगे बढ़ना चाहता है, तो युवाओं को केवल technology का consumer नहीं बल्कि technology का creator बनाना होगा।

छात्रों ने मंच पर बताई अपनी परेशानियां

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि राहुल गांधी ने केवल भाषण नहीं दिया बल्कि कई छात्रों से सीधे बातचीत की।

एक छात्र ने बताया कि उसने B.Ed. की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी, लेकिन नौकरी नहीं मिली। उसने कहा कि उसके सामने आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

एक छात्र ने बेहद भावुक होकर कहा कि उसके सामने दो विकल्प हैं—चाय की दुकान खोलना या आत्महत्या करना।

इस पर राहुल गांधी ने तुरंत उसे समझाते हुए कहा कि आत्महत्या कोई समाधान नहीं है।

उन्होंने छात्र से उसकी पारिवारिक स्थिति और कर्ज के बारे में पूछा और उसकी समस्या को ध्यान से सुना।

यह बातचीत कार्यक्रम के सबसे भावनात्मक क्षणों में से एक रही।

बिहार के छात्रों ने पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया

राहुल गांधी ने बिहार से आए छात्रों से भी बातचीत की।

एक छात्रा ने आरोप लगाया कि पटना में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। उसने 23 जुलाई के प्रदर्शन और उसके बाद की घटनाओं का उल्लेख किया।

एक अन्य छात्र ने दावा किया कि 22 जुलाई को पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

छात्र ने कहा कि प्रदर्शन के बाद उसे कई घंटे तक पुलिस स्टेशन में रखा गया।

उसने सवाल उठाया कि छात्रों को अपनी नौकरी, परीक्षा और भर्ती के लिए बार-बार आंदोलन क्यों करना पड़ता है।

राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि वे अपनी बात खुलकर रखें और डरें नहीं।

“हम छात्र हैं या आंदोलनजीवी?”

बिहार के छात्र ने अपने संबोधन में कहा कि पहले नौकरी के लिए आंदोलन करना पड़ता है, फिर पेपर के लिए, फिर result के लिए।

उसने सवाल किया कि आखिर छात्र बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर क्यों हैं।

राहुल गांधी ने छात्र की बात सुनते हुए कहा कि छात्रों को अपनी आवाज रखने का अधिकार है और लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने डर का सामना करें और अपनी आवाज शांतिपूर्ण तरीके से उठाएं।

“स्टूडेंट के दिल में नफरत नहीं, मोहब्बत होनी चाहिए”

राहुल गांधी ने कार्यक्रम के अंत में युवाओं को एक राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी दिया।

उन्होंने कहा कि छात्रों के दिल में नफरत नहीं बल्कि मोहब्बत होनी चाहिए।

उन्होंने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और उद्योगपति गौतम अडाणी का उल्लेख करते हुए सरकार और बड़े economic interests के बीच संबंधों पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को बदलाव के लिए लड़ना है, लेकिन यह लड़ाई नफरत के साथ नहीं बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से होनी चाहिए।

अडाणी की संपत्ति और RSS को लेकर आरोप

राहुल गांधी ने अपने भाषण में गौतम अडाणी की संपत्ति में कथित वृद्धि का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में कुछ बड़े industrial groups की wealth तेजी से बढ़ी है जबकि सामान्य युवा रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

उन्होंने RSS को लेकर भी आरोप लगाए कि विभिन्न संस्थानों में RSS से जुड़े लोगों की मौजूदगी बढ़ रही है।

इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है और राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनके भाषण के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।

“वोट चोरी” का भी मुद्दा

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में electoral system को लेकर अपने पुराने आरोपों को भी दोहराया।

उन्होंने voter lists और कथित irregularities का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में transparency आवश्यक है।

उनका कहना था कि युवाओं को केवल employment के मुद्दे पर ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक institutions की मजबूती के लिए भी अपनी आवाज उठानी चाहिए।

प्रयागराज में छात्रों की बड़ी मौजूदगी

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। कुछ छात्र reportedly trucks और containers पर चढ़कर कार्यक्रम सुनते दिखाई दिए।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी सड़क पर युवाओं की भीड़ दिखाई दी। कुछ युवाओं के हाथों में तिरंगा भी नजर आया।

कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में registrations का दावा किया था। हालांकि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद वास्तविक संख्या और registration के आंकड़े अलग-अलग हो सकते हैं।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 23 जिलों से छात्रों को बुलाए जाने की बात कही गई थी।

कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व

प्रयागराज का कार्यक्रम राहुल गांधी की छात्रों और युवाओं के बीच चल रही outreach campaign का हिस्सा है।

इससे पहले इसी अभियान के तहत वे कोटा और देहरादून में भी छात्रों से संवाद कर चुके हैं।

कोटा में शुरू हुए इस अभियान को कांग्रेस युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं, बेरोजगारी और education system से जोड़कर देख रही है।

प्रयागराज में इस campaign को और बड़ा political platform मिला, जहां राहुल गांधी ने सीधे छात्रों से बातचीत करके उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को अपने broader political narrative से जोड़ा।

सरकार पर निशाना, लेकिन युवाओं को सीधा संदेश

राहुल गांधी के पूरे भाषण में तीन themes सबसे ज्यादा प्रमुख रहीं—रोजगार, डेटा और लोकतांत्रिक अधिकार।

पहला, उनका दावा था कि education और employment के बीच gap बढ़ रहा है।

दूसरा, उन्होंने data और AI को आने वाली economy की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया।

तीसरा, उन्होंने छात्रों से अपनी आवाज उठाने और डर के खिलाफ खड़े होने की अपील की।

उनका कहना था कि युवाओं के सामने केवल परीक्षा पास करने की चुनौती नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी economic system की जरूरत है जिसमें उनकी education और skills को वास्तविक employment opportunities में बदला जा सके।

“डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं”

राहुल गांधी ने कहा कि आज परिवार लाखों रुपये खर्च करके बच्चों को college education देते हैं। लेकिन graduation के बाद degree रोजगार की गारंटी नहीं देती।

उन्होंने इस situation को बदलने के लिए education policy को employment और manufacturing policy से जोड़ने की जरूरत बताई।

उनके अनुसार, यदि देश में पर्याप्त manufacturing, startups, public-sector opportunities और modern private-sector jobs पैदा नहीं होतीं, तो केवल universities की संख्या बढ़ाने से youth unemployment की समस्या हल नहीं होगी।

युवाओं के लिए राहुल गांधी का मुख्य संदेश

प्रयागराज में राहुल गांधी के संबोधन को संक्षेप में देखें तो उनका मुख्य संदेश यह रहा—

पहला: शिक्षा का उद्देश्य केवल degree हासिल करना नहीं, बल्कि रोजगार और अवसर पैदा करना होना चाहिए।

दूसरा: पेपर लीक और recruitment delays युवाओं के वर्षों को बर्बाद कर सकते हैं।

तीसरा: AI आने वाले समय में employment structure बदल सकता है, इसलिए युवाओं को नई technology के लिए तैयार करना जरूरी है।

चौथा: Data आने वाली economy की महत्वपूर्ण ताकत है और युवाओं को data ownership को समझना चाहिए।

पांचवां: Manufacturing और small businesses को मजबूत किए बिना बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना मुश्किल होगा।

छठा: Government recruitment में transparency और timely examinations जरूरी हैं।

सातवां: छात्रों को अपनी समस्याओं के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए।

आठवां: युवाओं को social media और reels के excessive consumption में फंसने के बजाय अपने skills और future पर ध्यान देना चाहिए।

नौवां: राजनीतिक और सामाजिक बदलाव नफरत से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक भागीदारी से होना चाहिए।

निष्कर्ष

प्रयागराज में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम केवल एक राजनीतिक सभा नहीं रहा। इसका बड़ा हिस्सा छात्रों की व्यक्तिगत परेशानियां सुनने और उन्हें राष्ट्रीय रोजगार, शिक्षा और technology debate से जोड़ने पर केंद्रित रहा।

राहुल गांधी ने बेरोजगारी को लेकर सरकार पर तीखे आरोप लगाए और दावा किया कि युवाओं के सामने रोजगार के पारंपरिक रास्ते लगातार सीमित हो रहे हैं। उन्होंने manufacturing, startups, government jobs, public sector और corporate employment को पांच प्रमुख employment gateways के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि इन क्षेत्रों में पैदा हुई समस्याओं का सीधा असर युवाओं पर पड़ रहा है।

कार्यक्रम में छात्रों द्वारा सुनाई गई कहानियों ने बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था के मानवीय पक्ष को सामने रखा। किसी ने वर्षों से नौकरी की तलाश की बात कही, किसी ने जमीन बेचकर पढ़ाई करने के बाद बेरोजगार रहने की बात कही और एक छात्र ने निराशा में आत्महत्या तक का जिक्र किया।

राहुल गांधी ने इस पर कहा कि आत्महत्या समाधान नहीं है और युवाओं को अपनी आवाज के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

उनके भाषण में “रील 21वीं सदी का नशा है”, “डेटा ही नई ताकत है” और “सिस्टम ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा दिया है” जैसे संदेश प्रमुख रहे।

हालांकि राहुल गांधी द्वारा रोजगार, wealth distribution, public-sector jobs और अन्य मुद्दों पर दिए गए कई आंकड़े और आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिनका स्वतंत्र सत्यापन अलग-अलग स्रोतों से किया जाना आवश्यक है।

लेकिन राजनीतिक रूप से प्रयागराज का संदेश स्पष्ट रहा—कांग्रेस युवाओं की बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं और AI के कारण बदलते रोजगार बाजार को आगामी राजनीतिक विमर्श का प्रमुख मुद्दा बनाना चाहती है।

और राहुल गांधी ने छात्रों से यही कहा कि वे अपने भविष्य को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित न समझें, बल्कि अपनी आवाज, data, skills और लोकतांत्रिक अधिकारों की ताकत को पहचानें।

प्रयागराज की शाम का सबसे बड़ा संदेश यही रहा—युवा केवल नौकरी मांगने वाला वर्ग नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी ताकत है।

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