छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल, राजेंद्र आर्लेकर तमिलनाडु तो ओम प्रकाश माथुर केरल के राज्यपाल बने

अक्टूबर 13, 2026 - 15:32
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छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल, राजेंद्र आर्लेकर तमिलनाडु तो ओम प्रकाश माथुर केरल के राज्यपाल बने

छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल, राजेंद्र आर्लेकर तमिलनाडु तो ओम प्रकाश माथुर केरल के राज्यपाल बने

नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026

देश के छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल की घोषणा की गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया। इसके तहत केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा ओडिशा, कर्नाटक, उत्तराखंड और सिक्किम में भी नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छह राज्यों में हुए इन बदलावों में दो मौजूदा राज्यपालों को दूसरे राज्यों में भेजा गया है, जबकि चार अन्य नियुक्तियां की गई हैं। सभी नियुक्तियां संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पद का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी।

छह राज्यों में किसे मिली जिम्मेदारी?

राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, नई नियुक्तियों की सूची इस प्रकार है:

राज्य नवनियुक्त राज्यपाल
तमिलनाडु राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर
केरलम (केरल) ओम प्रकाश माथुर
ओडिशा ब्रज मोहन राम
कर्नाटक डॉ. सुधा यादव
उत्तराखंड डॉ. ढाल सिंह बिसेन
सिक्किम दुष्यंत गौतम

इन नियुक्तियों में राजेंद्र आर्लेकर और ओम प्रकाश माथुर का स्थानांतरण प्रमुख बदलाव है। आर्लेकर इससे पहले केरल के राज्यपाल थे और तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। अब उन्हें तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, सिक्किम के राज्यपाल रहे ओम प्रकाश माथुर को केरल भेजा गया है। उनके स्थान पर दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की नियुक्ति इस फेरबदल के प्रमुख पहलुओं में शामिल है। वे पहले केरल के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे और मार्च 2026 में तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंपा गया था। अब राष्ट्रपति की नई घोषणा के बाद उन्हें तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

तमिलनाडु में राज्यपाल का पद संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राज्यपाल राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। विधानसभा से पारित विधेयकों पर संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करना, मुख्यमंत्री की नियुक्ति और अन्य संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है।

राज्यपाल की भूमिका विशेष रूप से तब चर्चा में आती है, जब राज्य सरकार और केंद्र के बीच किसी संवैधानिक या विधायी मुद्दे पर मतभेद सामने आते हैं। हालांकि, राज्यपाल को अपने कार्य संविधान और लागू कानूनों के अनुरूप ही करने होते हैं। 

ओम प्रकाश माथुर अब संभालेंगे केरल का पद

ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम से स्थानांतरित कर केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे इससे पहले सिक्किम में राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। अब उनके स्थान पर दुष्यंत गौतम को सिक्किम की जिम्मेदारी दी गई है।

केरल में राज्यपाल का पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने, विधेयकों से संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं और राज्य सरकार के साथ विभिन्न औपचारिक कार्यों में भूमिका निभाते हैं। इन सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन संविधान में निर्धारित सीमाओं के भीतर किया जाता है।

राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना में नियुक्तियों के प्रभावी होने के लिए कार्यभार संभालने की तारीख को आधार बनाया गया है। इसलिए घोषणा जारी होने और संबंधित व्यक्ति के औपचारिक रूप से पद संभालने के बीच अंतर हो सकता है।

ओडिशा, कर्नाटक और उत्तराखंड में भी नई नियुक्तियां

राज्यपालों के फेरबदल के तहत ओडिशा में ब्रज मोहन राम, कर्नाटक में डॉ. सुधा यादव और उत्तराखंड में डॉ. ढाल सिंह बिसेन को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ तीनों राज्यों को नई संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने वाले राज्यपाल मिलेंगे।

राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में संवैधानिक दायित्व निभाते हैं। हालांकि, राज्य की निर्वाचित सरकार रोजमर्रा के शासन और प्रशासन का संचालन करती है। राज्यपाल की शक्तियां और कार्य संविधान में निर्धारित हैं तथा उनका प्रयोग संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।

नई नियुक्तियों के बाद इन राज्यों में राजभवन की जिम्मेदारियों का हस्तांतरण संबंधित व्यक्तियों के पदभार ग्रहण करने पर होगा। आधिकारिक आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी नियुक्तियां कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी। 

सिक्किम में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति

सिक्किम के नए राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम को नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ओम प्रकाश माथुर को केरल स्थानांतरित किए जाने के बाद हुई है।

सिक्किम पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है। यहां राज्यपाल का पद अन्य राज्यों की तरह संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है। राज्यपाल राज्य सरकार के साथ संवैधानिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं और संविधान के तहत निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के साथ सिक्किम में राज्यपाल के पद पर बदलाव होगा। हालांकि, नियुक्ति के प्रशासनिक प्रभाव और कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया संबंधित औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद आगे बढ़ेगी। 

राज्यपाल की नियुक्ति कैसे होती है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। अनुच्छेद 156 में राज्यपाल के कार्यकाल से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। सामान्य रूप से राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं और उनका निर्धारित कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार पद पर बने रहने की स्थिति अलग हो सकती है।

राज्यपाल का पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण है। वे राज्य के औपचारिक प्रमुख होते हैं, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद सामान्यतः राज्य के शासन का संचालन करते हैं। राज्यपाल को संविधान के अनुरूप कार्य करना होता है और उनकी भूमिका का निर्धारण संवैधानिक प्रावधानों तथा न्यायिक व्याख्याओं से होता है।

छह राज्यों में हुए इस फेरबदल से अलग-अलग राजभवनों में नेतृत्व बदलेगा। हालांकि, इन नियुक्तियों के पीछे सरकार की ओर से कोई विस्तृत कारण आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में नहीं बताया गया है। इसलिए बदलाव के पीछे किसी विशेष राजनीतिक उद्देश्य को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

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