IIT-दिल्ली ने तैयार किया स्वदेशी माइक्रो-GPU, ई-रिक्शा से इंडस्ट्रियल डिस्प्ले तक हो सकता है इस्तेमाल

सितम्बर 25, 2026 - 21:08
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IIT-दिल्ली ने तैयार किया स्वदेशी माइक्रो-GPU, ई-रिक्शा से इंडस्ट्रियल डिस्प्ले तक हो सकता है इस्तेमाल

IIT-दिल्ली ने तैयार किया स्वदेशी माइक्रो-GPU, ई-रिक्शा से इंडस्ट्रियल डिस्प्ले तक हो सकता है इस्तेमाल

नई दिल्ली। भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग तकनीक विकसित करने की दिशा में IIT-दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने देश का पहला कार्यशील और प्रदर्शन-योग्य स्वदेशी माइक्रो-ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (Micro-GPU) डिजाइन और विकसित किया है। संस्थान के अनुसार, यह किसी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा विकसित पहला working, demonstrable indigenous micro-GPU है।

यह माइक्रो-GPU मुख्य रूप से कम लागत वाले एम्बेडेड डिवाइसों में ग्राफिक्स और डिस्प्ले प्रोसेसिंग के लिए तैयार किया गया है। इसके संभावित इस्तेमाल में ई-रिक्शा के डैशबोर्ड और नेविगेशन सिस्टम, औद्योगिक कंट्रोल डिस्प्ले, कम लागत वाले Human-Machine Interface (HMI), छोटी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए नेविगेशन टर्मिनल और शैक्षणिक ई-बुक रीडर जैसे उपकरण शामिल हैं।

क्या है IIT-दिल्ली का स्वदेशी माइक्रो-GPU?

Graphics Processing Unit यानी GPU ऐसा प्रोसेसर है जो मुख्य रूप से ग्राफिक्स, विजुअल डेटा और डिस्प्ले से जुड़े कंप्यूटिंग कार्यों को संभालता है। आधुनिक कंप्यूटर और स्मार्टफोन से लेकर AI और मशीन लर्निंग सिस्टम तक GPU तकनीक का इस्तेमाल होता है।

IIT-दिल्ली की टीम ने हालांकि हाई-एंड गेमिंग या AI कंप्यूटिंग के लिए GPU बनाने के बजाय कम लागत वाले embedded systems को ध्यान में रखते हुए एक छोटा और programmable graphics processor architecture तैयार किया है। इसका उद्देश्य ऐसे उपकरणों के लिए स्थानीय स्तर पर graphics-processing capability विकसित करना है, जहां बहुत ज्यादा processing power की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन स्क्रीन और graphical interface चलाने की जरूरत होती है।

IIT-दिल्ली के अनुसार वर्तमान में GPU हार्डवेयर के क्षेत्र में भारत आयात पर निर्भर है। ऐसे में स्वदेशी GPU architecture का विकास भविष्य में घरेलू graphics और display-processing systems तैयार करने की दिशा में उपयोगी हो सकता है।

M.Tech छात्रों ने किया प्रोजेक्ट पर काम

इस परियोजना का नेतृत्व IIT-दिल्ली के M.Tech छात्रों नम्मी आकाश और एम. रवि तेजा ने किया। उन्हें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जयदेवा और प्रोफेसर कौशिक साहा का मार्गदर्शन मिला।

शोधकर्ताओं ने एक custom floating-point GPU engine तैयार किया है। इसकी hardware architecture को Register Transfer Language (RTL) में डिजाइन किया गया और फिर इसे Spartan-7 Field Programmable Gate Array (FPGA) प्लेटफॉर्म पर implement किया गया।

FPGA एक programmable hardware platform होता है, जिसे डिजिटल सर्किट और processor architectures के development तथा testing के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रोजेक्ट में इसी प्लेटफॉर्म पर graphics rendering को प्रदर्शित किया गया है।

अभी सिलिकॉन चिप के रूप में बाजार में नहीं आई

इस उपलब्धि को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर समझना जरूरी है। IIT-दिल्ली की टीम ने एक कार्यशील micro-GPU architecture का FPGA-based demonstration किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि यह GPU अभी किसी commercial silicon chip के रूप में बड़े पैमाने पर manufacture होकर बाजार में उपलब्ध है।

शोधकर्ताओं का अगला लक्ष्य इस architecture को आगे विकसित करके ASIC यानी Application-Specific Integrated Circuit के रूप में तैयार करना है। ASIC में किसी processor या circuit design को वास्तविक silicon chip के रूप में manufacture किया जाता है।

टीम ने इसके लिए आगे की योजना में 65-nanometre ASIC process पर proof-of-concept विकसित करने की दिशा में काम करने की बात कही है।

ई-रिक्शा और इंडस्ट्रियल डिस्प्ले में हो सकता है इस्तेमाल

इस micro-GPU का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका target application है। इसे ऐसे embedded systems के लिए डिजाइन किया गया है, जहां कम लागत, कम power consumption और पर्याप्त graphics capability की जरूरत होती है।

संभावित applications में:

  • ई-रिक्शा डैशबोर्ड और नेविगेशन सिस्टम

  • Industrial control displays

  • Low-cost Human-Machine Interfaces

  • छोटी मछली पकड़ने वाली नावों के navigation terminals

  • Educational e-book readers

  • अन्य embedded visualization systems

शामिल हैं।

उदाहरण के लिए किसी ई-रिक्शा में स्पीड, बैटरी स्टेटस, रेंज, नेविगेशन और अन्य जानकारी दिखाने के लिए डिस्प्ले सिस्टम की आवश्यकता होती है। ऐसे उपकरणों में हाई-एंड GPU की जरूरत नहीं होती। इसी तरह किसी industrial machine के control panel में भी graphical interface चलाने के लिए एक compact graphics processor पर्याप्त हो सकता है।

8 से 16 कोर वाले architecture पर आगे काम

IIT-दिल्ली की टीम ने इस project को यहीं समाप्त नहीं किया है। शोधकर्ता अब 8–16 core vector-style graphics processor architecture विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

इसके साथ optimized compiler और graphics software toolchain तैयार करने की योजना भी है। यानी भविष्य में केवल hardware ही नहीं, बल्कि उसके साथ काम करने वाला software ecosystem भी विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

टीम का दीर्घकालिक लक्ष्य इस technology को FPGA demonstration से आगे ले जाकर ASIC-based implementation की दिशा में बढ़ाना है। इसके लिए 65nm semiconductor process पर proof-of-concept विकसित करने की योजना बताई गई है।

कम लागत वाले भारतीय उपकरणों के लिए महत्वपूर्ण संभावना

शोधकर्ताओं के अनुसार, 65nm जैसी mature semiconductor process technology का इस्तेमाल उन applications में किया जा सकता है जहां अत्याधुनिक semiconductor node की बजाय कम लागत, practical deployment और power efficiency ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

इसका मतलब यह है कि IIT-दिल्ली का यह project सीधे NVIDIA या AMD जैसे high-performance GPU products को प्रतिस्थापित करने के लिए तैयार नहीं किया गया है। इसका focus अलग है—ऐसे affordable embedded devices जहां basic programmable graphics processing की आवश्यकता होती है।

यह distinction इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि GPU शब्द सुनते ही आमतौर पर gaming या AI accelerator जैसे high-performance hardware की तस्वीर सामने आती है। IIT-दिल्ली का micro-GPU मुख्य रूप से embedded graphics processing के लिए बनाया गया है।

स्वदेशी hardware ecosystem की दिशा में कदम

IIT-दिल्ली का यह प्रोजेक्ट भारत में indigenous computing और semiconductor design capabilities विकसित करने की व्यापक कोशिशों के बीच सामने आया है। सितंबर 2026 में हुए SEMICON India 2026 में भी indigenous processor design, RISC-V innovation, AI और semiconductor talent development पर कई initiatives सामने आए थे।

इस तरह के academic hardware projects का महत्व केवल एक prototype बनाने तक सीमित नहीं होता। इनके माध्यम से students और researchers को processor architecture, digital design, RTL, FPGA implementation, compiler development और embedded systems जैसे क्षेत्रों में practical experience मिलता है।

IIT-दिल्ली के प्रोफेसर कौशिक साहा के अनुसार, इस project में students ने arithmetic hardware, programmable architecture, compiler और embedded-system thinking को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है।

आगे commercialization की तैयारी

शोध टीम अब ASIC development, system integration और भविष्य में technology commercialization के लिए funding support हासिल करने की दिशा में काम करने की योजना बना रही है। यदि architecture को ASIC में सफलतापूर्वक बदला जाता है और इसका commercial deployment होता है, तो यह भारत में कम लागत वाले embedded graphics hardware के विकास के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है।

फिलहाल यह technology research और FPGA demonstration stage में है। इसलिए इसके बड़े पैमाने पर production, commercial availability या बाजार में आने की समयसीमा को लेकर अभी कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है।

निष्कर्ष

IIT-दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित स्वदेशी micro-GPU भारत में graphics hardware design के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण research development है। इसकी खासियत high-end gaming या AI performance के बजाय कम लागत वाले embedded applications के लिए programmable graphics processing है।

ई-रिक्शा डैशबोर्ड, industrial displays, navigation terminals और educational devices जैसे क्षेत्रों में भविष्य में इसके इस्तेमाल की संभावना बताई गई है। अभी यह Spartan-7 FPGA पर demonstrated architecture है, जबकि टीम आगे 8–16 core architecture, software toolchain और 65nm ASIC proof-of-concept की दिशा में बढ़ रही है।

यदि यह research सफलतापूर्वक ASIC और फिर commercial products तक पहुंचती है, तो भारत के लिए indigenous graphics-processing hardware ecosystem विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण अगला चरण हो सकता है।

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