जोधपुर में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार, विश्वविद्यालय ने सेवा समाप्त की
जोधपुर में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार, विश्वविद्यालय ने सेवा समाप्त की
राजस्थान समाचार | जोधपुर | 13 अक्टूबर 2026
जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में एक सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय से जुड़े एक सहायक प्रोफेसर को छात्राओं की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ आपत्तिजनक संदेश भेजने, अनुचित व्यवहार करने और छात्राओं को परेशान करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी की सेवाएं समाप्त कर मामले की आंतरिक जांच के लिए समिति भी गठित की है।
मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। पुलिस अब शिकायतों, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। अदालत ने आरोपी को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है, ताकि पूछताछ के जरिए मामले से संबंधित जानकारी जुटाई जा सके।
छात्रा की शिकायत के बाद सामने आया मामला
पुलिस के अनुसार, एक छात्रा ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि संबंधित सहायक प्रोफेसर जनवरी 2026 से उसके साथ अनुचित व्यवहार कर रहा था। शिकायत में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने, पीछा करने और कथित यौन उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने व्हाट्सऐप संदेशों सहित कुछ डिजिटल सामग्री भी प्रस्तुत की। अन्य छात्राओं की ओर से भी आरोपी के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आने की खबर है।
छात्राओं ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश भेजे गए और निजी संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया। कुछ शिकायतों में अनुचित टिप्पणियों और विरोध करने पर परेशान किए जाने के आरोप भी शामिल हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी। फिलहाल मामले में आरोपी को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि कानूनी प्रक्रिया जारी है।
छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन के बाद बढ़ी कार्रवाई
मामला सार्वजनिक होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधित विद्यार्थियों से बातचीत की गई और आरोपी के खिलाफ संस्थागत स्तर पर कार्रवाई की गई। प्रशासन ने उसकी सेवाएं समाप्त करने के साथ मामले की जांच के लिए समिति गठित की है।
विश्वविद्यालय में इस घटनाक्रम के बाद छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनने, शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने और परिसर में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी को सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया।
जांच के दौरान पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन से संबंधित डिजिटल डेटा की जांच करेगी। इसके अलावा शिकायतकर्ता के बयान, उपलब्ध संदेशों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और जांच में क्या निष्कर्ष निकले हैं, इसकी विस्तृत पुष्टि आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
पुलिस का उद्देश्य शिकायतों की सत्यता, घटनाक्रम और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाना है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने गठित की जांच समिति
आरोप सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित शिक्षक की सेवाएं समाप्त कर दीं और मामले की आंतरिक जांच के लिए समिति गठित की। समिति का काम उपलब्ध शिकायतों और तथ्यों की समीक्षा करना बताया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि शिकायतकर्ता छात्राओं को बिना दबाव के अपनी बात रखने का अवसर मिले और जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रहे। साथ ही, गोपनीयता और संबंधित पक्षों के कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
यदि जांच में संस्थागत स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के तथ्य सामने आते हैं, तो उन पर भी नियमानुसार कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। फिलहाल ऐसे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
उच्च शिक्षण संस्थानों में शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल
यह घटना उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायत निवारण प्रणाली की प्रभावशीलता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे अनुचित व्यवहार या उत्पीड़न की शिकायत बिना भय के दर्ज करा सकें।
शैक्षणिक संस्थानों में शिकायतों की समयबद्ध जांच, गोपनीयता की सुरक्षा, प्रतिशोध से बचाव और शिकायतकर्ता को उचित सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच के दौरान किसी विद्यार्थी की पढ़ाई या शैक्षणिक अवसर प्रभावित न हों।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक संस्थाओं की भूमिका केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। स्पष्ट शिकायत प्रक्रिया, जागरूकता कार्यक्रम और प्रभावी निगरानी से सुरक्षित परिसर बनाने में मदद मिल सकती है।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
जोधपुर के इस मामले में अब पुलिस जांच, डिजिटल साक्ष्यों के परीक्षण और विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच पर ध्यान केंद्रित है। पुलिस को यह पता लगाना है कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं और घटनाओं का वास्तविक क्रम क्या था।
आरोपी की गिरफ्तारी और विश्वविद्यालय द्वारा सेवाएं समाप्त किए जाने के बावजूद आपराधिक मामले का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत की कार्यवाही के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
निष्कर्ष: जोधपुर में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी और विश्वविद्यालय की कार्रवाई ने छात्र सुरक्षा का मुद्दा फिर चर्चा में ला दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच समिति गठित की है। अब जांच के निष्कर्ष और कानूनी प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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