हिरासत में मौतों का आंकड़ा जारी, सभी मामलों में जांच के आदेश
हिरासत में मौतों का आंकड़ा जारी, सभी मामलों में जांच के आदेश
राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2024 से 2025 के बीच राज्य में कुल 21 हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) के मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मामलों में न्यायिक और प्रशासनिक जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी।
गृह विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन घटनाओं में पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत दोनों के मामले शामिल हैं। सरकार ने कहा कि हर मामले में मजिस्ट्रेट स्तर की जांच अनिवार्य रूप से कराई जा रही है, ताकि मौत के कारणों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट पहचान हो सके। जहां आवश्यक होगा, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि हिरासत में मौत जैसे मामलों से कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों पर सवाल खड़े होते हैं। विधानसभा में इस विषय पर तीखी बहस भी हुई, जिसमें कई सदस्यों ने स्वतंत्र निगरानी तंत्र और सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मानवाधिकार संगठनों ने भी इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि हिरासत में मौत की हर घटना की गहन जांच होनी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस सुधार, प्रशिक्षण और जवाबदेही तंत्र को मजबूत करने से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
सरकार ने यह भी बताया कि हिरासत केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं, मेडिकल जांच और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सभी थानों और जेलों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता और उच्चाधिकारियों की आकस्मिक जांच सुनिश्चित की जा रही है।
कुल मिलाकर, 21 हिरासत में मौतों का खुलासा एक गंभीर विषय है, जिसने राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्टों पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि इन घटनाओं के पीछे क्या कारण रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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