ईरान के नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई चुने गए

मार्च 6, 2026 - 17:05
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई चुने गए

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ईरान के नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई चुने गए

ईरान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। वे लंबे समय से ईरानी सत्ता के प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक चेहरों में गिने जाते रहे हैं और अब उन्हें आधिकारिक तौर पर देश की सर्वोच्च धार्मिक-राजनीतिक पदवी मिलने की खबर ने मध्य-पूर्व की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

ईरान में सुप्रीम लीडर का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इस पद पर बैठा व्यक्ति सेना, न्यायपालिका, सुरक्षा एजेंसियों और कई प्रमुख सरकारी संस्थाओं पर अंतिम अधिकार रखता है। इससे पहले यह पद Ali Khamenei के पास था, जो कई दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। मोजतबा खामेनेई उनके बेटे हैं और लंबे समय से राजनीतिक हलकों में उनके संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई पिछले कई वर्षों से पर्दे के पीछे ईरान की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। वे धार्मिक संस्थानों, सुरक्षा प्रतिष्ठान और प्रभावशाली राजनीतिक समूहों के साथ गहरे संबंध रखते हैं। हालांकि वे औपचारिक रूप से किसी बड़े सरकारी पद पर नहीं रहे, लेकिन कई रिपोर्टों में उन्हें सत्ता के महत्वपूर्ण फैसलों में प्रभाव डालने वाला व्यक्ति बताया जाता रहा है।

ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर का चयन Assembly of Experts नामक धार्मिक परिषद द्वारा किया जाता है। यह परिषद वरिष्ठ इस्लामी विद्वानों और धार्मिक नेताओं से मिलकर बनी होती है। परिषद का काम देश के सर्वोच्च नेता का चयन करना और उनकी निगरानी करना होता है।

मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई पश्चिमी देशों और विश्लेषकों का मानना है कि इससे ईरान की मौजूदा नीतियों में निरंतरता देखने को मिल सकती है, खासकर क्षेत्रीय राजनीति, सुरक्षा नीति और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के मुद्दों पर।

मिडिल ईस्ट पहले से ही तनावपूर्ण हालात से गुजर रहा है। ऐसे में ईरान में नेतृत्व परिवर्तन का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए सुप्रीम लीडर के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी, जिनमें आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय संघर्ष और देश के अंदर राजनीतिक संतुलन बनाए रखना शामिल है।

ईरान के भीतर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि सत्ता का एक ही परिवार में बने रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हुई हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की घरेलू और विदेश नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका मिडिल ईस्ट की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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