ओडिशा के कंधमाल में बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन, सीपीआई (माओवादी) का शीर्ष नेता गणेश उइके ढेर
ओडिशा के कंधमाल में बड़ा नक्सल विरोधी ऑपरेशन, सीपीआई (माओवादी) का शीर्ष नेता गणेश उइके ढेर
कंधमाल (ओडिशा)। ओडिशा के कंधमाल जिले में गुरुवार, 25 दिसंबर 2025 को सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम देते हुए सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य और ओडिशा में संगठन के प्रमुख गणेश उइके सहित छह नक्सलियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन को नक्सल विरोधी अभियान की अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
मुठभेड़ चकापाद थाना क्षेत्र के घने और दुर्गम जंगलों में खुफिया एजेंसियों से मिले सटीक इनपुट के आधार पर की गई। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर सुनियोजित तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया। मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई, जिसमें छह नक्सली मारे गए।
मारे गए नक्सलियों में सीपीआई (माओवादी) का शीर्ष नेता गणेश उइके भी शामिल है, जिस पर कुल 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। गणेश उइके को नक्सली संगठन का बेहद खतरनाक रणनीतिकार माना जाता था और वह वर्ष 2013 के झीरम घाटी नरसंहार का मास्टरमाइंड भी बताया जाता है, जिसमें कई वरिष्ठ राजनीतिक नेता मारे गए थे।
सुरक्षा बलों के अनुसार, मारे गए नक्सलियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं, जबकि अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घटनास्थल से बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और नक्सली साहित्य बरामद किया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह इलाका लंबे समय से नक्सलियों का सक्रिय ठिकाना रहा है।
ऑपरेशन के बाद पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, ताकि किसी भी संभावित नक्सली की मौजूदगी को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और इलाके को सुरक्षित बनाया जा सके। सुरक्षा बल किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहते और पूरे क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
गणेश उइके मूल रूप से तेलंगाना के नलगोंडा जिले का निवासी था और वह संगठन के भीतर पक्का हनुमंतु और राजेश तिवारी जैसे नामों से भी जाना जाता था। वह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में नक्सली गतिविधियों को संचालित करता था।
इस बड़ी सफलता पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों को बधाई देते हुए इसे “नक्सल-मुक्त भारत” की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ओडिशा को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गणेश उइके के मारे जाने से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है और आने वाले समय में पूर्वी भारत में नक्सली गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है।
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