कोटा: ईएसआईसी अस्पताल पर मरीजों की शिकायतें, इलाज व्यवस्था पर उठे सवाल

जून 26, 2026 - 15:53
जून 27, 2026 - 20:16
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कोटा: ईएसआईसी अस्पताल पर मरीजों की शिकायतें, इलाज व्यवस्था पर उठे सवाल

कोटा: ईएसआईसी अस्पताल पर मरीजों की शिकायतें, इलाज व्यवस्था पर उठे सवाल

कोटा। शहर के ईएसआईसी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मरीजों और उनके परिजनों ने गंभीर शिकायतें उठाई हैं। आरोप है कि अस्पताल में बीमार मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है और इलाज की प्रक्रिया कई बार बाधित हो रही है।

मरीजों का कहना है कि अस्पताल में दवाइयों की कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता तथा रेफरल प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि दवा काउंटर पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं थीं, जिसके चलते उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं।

शिकायतों में प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी और मरीजों की समस्याओं के समाधान में देरी का मुद्दा भी सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि मरीजों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही है।

हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने दावा किया कि संसाधनों और व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा मरीजों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

मामले को लेकर अब अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। मरीजों और स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की है।

यहाँ फ़ाइल  में दिए गए मुख्य समाचार और टेक्स्ट का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:

कोटा का ईएसआईसी अस्पताल: बीमा कटता रहा, इलाज अटकता रहा

केस-1

  • मरीज: जानकी देवी

  • समस्या: ईएसआईसी अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जानकी अपने बेटे के साथ पहुंची थीं। उन्हें गैस की शिकायत के कारण चक्कर आने की समस्या थी। चिकित्सक को दिखाने पर जो दवाएं पर्चे में लिखी गई थीं, उसमें से केवल एक ही दवा काउंटर पर मिली। फार्मासिस्ट ने शेष दो दवा बाहर से खरीदने की सलाह दी। जबकि उक्त दोनों दवाएं दूसरे काउंटर पर उपलब्ध थीं। दूसरे काउंटर के फार्मासिस्ट ने यह कहते हुए दवा देने से मना कर दिया कि उनका पर्चा दो दिन पुराना है। जबकि पर्चे पर चिकित्सक ने उसी दिन की मुहर लगा दी थी। इसके बावजूद ना तो पूरी दवा मिली ना ही एनओसी बनाकर दी गई।

केस-2

  • मरीज: मधु (मुकेश कुमार की पत्नी)

  • समस्या: डीसीएम निवासी मुकेश कुमार को हार्ट की बीमारी है। जिसे ईएसआईसी से मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में रेफर किया गया था। मुकेश की पत्नी मधु व बेटी अंजली ने मेडिकल कॉलेज के स्थान पर निजी चिकित्सालय में रेफर करने का आग्रह किया लेकिन चिकित्सकों ने उनकी नहीं सुनी। चिकित्सकों ने मुकेश कुमार के शरीर पर सूजन रहने से उसे बेड रेस्ट की सलाह दी। ईएसआईसी प्रबंधन ने पर्चे पर एक माह का रेस्ट लिखकर मेडिकल कॉलेज से रोगी मुकेश को साथ लाने को कहा। जबकि मधु का कहना था कि उसके पति यहां आने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें जबरन परेशान किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु (हाइलाइट्स)

  • दवाओं की कमी, डॉक्टरों का अभाव

  • रेफरल की मजबूरी और प्रशासनिक दूरी से मरीज परेशान

  • जननायक संवाददाता (कोटा): कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) का उद्देश्य संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों और उनके परिजनों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए कर्मचारियों के वेतन से अंशदान काटा जाता है ताकि उन्हें आर्थिक बोझ उठाए बिना इलाज मिल सके। लेकिन कोटा में ईएसआईसी अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं पर मरीज गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष भी यहां की चिकित्सा व्यवस्था पर नाराजगी जता चुके हैं। इसके बावजूद इस अस्पताल में सुधार नहीं होना चिकित्सा व्यवस्था को ही रुग्ण कर रहा है। अस्पताल से जुड़े मरीजों की शिकायतें दवा उपलब्धता, डॉक्टरों की कमी, बढ़ती मरीज संख्या, रेफरल प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर है। यह सैकड़ों बीमित कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय है।

प्रमुख शिकायतें और समस्याएं

दवा काउंटर को लेकर शिकायतें सबसे ज्यादा

सबसे बड़ी शिकायत दवाओं की उपलब्धता को लेकर है। कुछ मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई सभी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं कराई जातीं और उन्हें कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। एक मरीज ने दावा किया कि चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाओं में से उसे केवल एक दवा अस्पताल से मिली, जबकि बाकी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। मरीजों का कहना है कि ईएसआईसी सुविधा का उद्देश्य ही इलाज का खर्च कम करना है। ऐसे में यदि दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ें तो ऐसी योजना का क्या लाभ। हालांकि इन आरोपों के बारे में पूछने के लिए जननायक की टीम ने ईएसआईसी अस्पताल अधीक्षक से बार-बार सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया।

मरीजों का बढ़ता दबाव

अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन लगभग 400 से 450 मरीजों की ओपीडी है। मरीजों की तुलना में उपलब्ध संसाधन सीमित होने पर चिकित्सीय और प्रशासनिक दबाव है। यदि मरीजों की संख्या के अनुरूप डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों तो सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी। अस्पताल की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी चुनौती

अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर भी विवाद है। कुछ मरीजों का दावा है कि कई विभागों में स्थायी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है और कुछ सेवाएं वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे चल रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर मरीजों पर पड़ता है। इससे जांच और उपचार में देरी होती है तथा मरीजों को अन्य संस्थानों में रेफर करने की नौबत आती है। हालांकि हाल के महीनों में कुछ नए चिकित्सकों की नियुक्ति होने से स्थिति में आंशिक सुधार की बात भी कही जा रही है।

रेफरल प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

मरीजों को दूर स्थित चिकित्सा संस्थानों में रेफर किए जाने की प्रक्रिया भी चर्चा में है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को दूर स्थित अस्पतालों में भेजा जाता है। गंभीर मरीजों के लिए लंबी दूरी तय करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा यात्रा और अन्य खर्च भी मरीज और उसके परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। मरीजों का कहना है कि जहां तक संभव हो, स्थानीय स्तर पर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

प्रशासनिक पहुंच पर भी सवाल

अस्पताल प्रशासन को लेकर मरीजों ने असंतोष व्यक्त किया। उनका आरोप है कि वे अपनी शिकायतें और समस्याएं लेकर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रवि शर्मा से मिलना चाहते थे, लेकिन वे किसी से मिलते नहीं हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल जैसी सार्वजनिक संस्था में चलित अधिकारियों तक मरीजों और आम लोगों की पहुंच आसान होनी चाहिए। संवाद की कमी कई बार असंतोष को और बढ़ा देती है।

सुधार की जरूरत क्यों?

स्वास्थ्य सेवाओं में शिकायतें होना नई बात नहीं है, लेकिन जब एक जैसी शिकायतें बार-बार सामने आने लगें तो उनकी गंभीर समीक्षा जरूरी हो जाती है। दवा उपलब्धता, डॉक्टरों की कमी, रेफरल व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे केवल सुविधाओं से जुड़े नहीं हैं, बल्कि मरीजों के विश्वास से भी जुड़े हुए हैं।

हाड़ौती क्षेत्र के सैकड़ों कर्मचारी और उनके परिवार ईएसआईसी अस्पताल पर निर्भर हैं। ऐसे में अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक, दवाओं का नियमित भंडार, आधुनिक जांच सुविधाएं और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

भरोसे की कसौटी पर अस्पताल

वर्षों तक अंशदान देने वाला कर्मचारी बीमारी के समय केवल पर्ची या परामर्श नहीं, बल्कि संपूर्ण और सम्मानजनक उपचार की अपेक्षा रखता है। कोटा का ईएसआईसी अस्पताल आज इसी कसौटी पर खड़ा दिखाई देता है। केवल दवाओं, डॉक्टरों या रेफरल ही नहीं, बल्कि भरोसे का सम्मान भी जरूरी है जो हर महीने कर्मचारियों की कमाई से कटने वाले अंशदान के साथ इस व्यवस्था में जमा होता है। यदि उस भरोसे को बनाए रखना है तो सुधार की प्रक्रिया को और तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा।

इनका कहना है

"मरीजों को रेफर हमारा सिस्टम तय करता है। हमारा मेडिकल कॉलेज से टाईअप है। इसलिए उन्हें आंखों का सहायक डॉक्टर है। दांत का मेडिकल कॉलेज का जूनियर है। स्किन का डॉक्टर आने वाला है। डिस्पेंसरी की 24 घंटे सुविधा है जबकि मरीजों के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध है। नए वित्तीय वर्ष में दवाओं की कमी दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।"

डॉ. रविन्द्र सोनी, सीनियर डॉक्टर, ईएसआईसी हॉस्पिटल

"अस्पताल में मरीजों को इलाज, दवाएं और अन्य सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। सोनोग्राफी मशीन जल्द उपलब्ध होगी। अस्पताल में 21 बेड की व्यवस्था है और मरीजों को भोजन व विशेष डाइट भी दी जा रही है। रोजाना 500-600 ओपीडी है जबकि 50-60 मरीज भर्ती होते हैं। हालांकि कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और स्किन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।"

मदन लाल राव, सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर, ईएसआईसी हॉस्पिटल

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