पेंटागन रिपोर्ट पर चीन का कड़ा ऐतराज, भारत-चीन संबंधों में दरार डालने का अमेरिका पर आरोप

दिसम्बर 26, 2025 - 12:38
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पेंटागन रिपोर्ट पर चीन का कड़ा ऐतराज, भारत-चीन संबंधों में दरार डालने का अमेरिका पर आरोप

पेंटागन रिपोर्ट पर चीन का कड़ा ऐतराज, भारत-चीन संबंधों में दरार डालने का अमेरिका पर आरोप

बीजिंग। चीन ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की हालिया रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए अमेरिका पर भारत-चीन संबंधों में दरार डालने और चीन की रक्षा नीति को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है। चीन ने रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों को निराधार, भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है तथा अमेरिका से ऐसे बयानों से बचने की अपील की है।

पेंटागन की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन भारत-पाकिस्तान सीमा विवाद का फायदा उठाकर भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत होने से रोकने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि चीन पाकिस्तान के साथ रक्षा और रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद केवल दोनों देशों के बीच का मामला है और किसी तीसरे देश को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को इस विषय में बयानबाजी करने से पहले अपने रुख पर आत्ममंथन करना चाहिए।

लिन जियान ने कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक, दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण से देखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन हमेशा से सीमा विवाद को शांतिपूर्ण बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाने के पक्ष में रहा है। उनके अनुसार, बाहरी शक्तियों द्वारा इस मुद्दे को राजनीतिक या रणनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नुकसानदेह है।

चीन ने अमेरिकी रिपोर्ट में चीन-पाकिस्तान के बीच रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग से जुड़े दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर देशों के बीच अविश्वास बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका का यह रवैया शीतयुद्ध जैसी मानसिकता को दर्शाता है।

चीन ने अमेरिका से अपील की है कि वह झूठे आरोप लगाने और टकराव बढ़ाने की नीति छोड़कर सहयोग और संवाद का रास्ता अपनाए। चीन के अनुसार, ऐसी रिपोर्टें न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं।

हालांकि, भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन भारत को चीन के इरादों को लेकर अब भी संदेह बना हुआ है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बीते वर्षों में हुई झड़पों और सैन्य गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच आपसी अविश्वास गहराया है। यही कारण है कि भारत-चीन संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, चीन और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति को और जटिल बना रही है। ऐसे में किसी भी पक्ष द्वारा दिए गए बयान या रिपोर्ट का असर द्विपक्षीय ही नहीं, बल्कि बहुपक्षीय संबंधों पर भी पड़ता है।

कुल मिलाकर, पेंटागन रिपोर्ट पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत-चीन संबंध एक संवेदनशील मोड़ पर हैं, जहां किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को दोनों देशों के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

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