भारत में मतदाता सूची का सबसे बड़ा विशेष पुनरीक्षण शुरू, 51 करोड़ मतदाता होंगे शामिल

अक्टूबर 30, 2025 - 17:07
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भारत में मतदाता सूची का सबसे बड़ा विशेष पुनरीक्षण शुरू, 51 करोड़ मतदाता होंगे शामिल

भारत में मतदाता सूची का सबसे बड़ा विशेष पुनरीक्षण शुरू, 51 करोड़ मतदाता होंगे शामिल

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दूसरे चरण की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। यह अभूतपूर्व प्रक्रिया देश का सबसे बड़ा मतदाता सत्यापन अभियान माना जा रहा है, जिसमें 12 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 51 करोड़ मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 2002–2005 के बाद यह पहला राष्ट्रव्यापी विशेष पुनरीक्षण है।

घर–घर सत्यापन शुरू

इस प्रक्रिया के लिए 5.33 लाख बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और राजनीतिक दलों के 7 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) घर–घर जाकर मतदाता सत्यापन करेंगे। गणना (Enumeration) की अवधि 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक तय की गई है।

विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या डुप्लिकेट प्रविष्टि न रह जाए।

शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश

इस चरण में शामिल क्षेत्र:

  • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

  • छत्तीसगढ़

  • गोवा

  • गुजरात

  • केरल

  • लक्षद्वीप

  • मध्य प्रदेश

  • पुडुचेरी

  • राजस्थान

  • तमिलनाडु

  • उत्तर प्रदेश

  • पश्चिम बंगाल

असम को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, क्योंकि वहाँ राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और विशिष्ट नागरिकता सत्यापन प्रक्रियाएँ पहले से चल रही हैं।

मुख्य तिथियाँ

प्रक्रिया तिथि
गृह सर्वे/गणना 4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025
ड्राफ्ट सूची जारी 8–9 दिसंबर 2025
दावे एवं आपत्तियाँ 9 दिसंबर 2025 – 8 जनवरी 2026
सुनवाई एवं सत्यापन 9 दिसंबर 2025 – 31 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026

दस्तावेज़ और पात्रता नियम

  • हर मतदाता को नया गणना प्रपत्र भरना अनिवार्य

  • जिनका नाम 2002–2005 SIR सूची में नहीं था, उन्हें पात्रता प्रमाण देना होगा

  • पहचान सत्यापन के लिए आधार का उपयोग संभव, पर यह नागरिकता प्रमाण नहीं होगा

  • मान्य दस्तावेज़: आधार, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, शैक्षिक प्रमाणपत्र आदि

चुनावी पारदर्शिता पर ज़ोर

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि राजनीतिक दलों को SIR प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाए और निगरानी सुनिश्चित की जाए।

आयोग का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया एक संवैधानिक दायित्व है और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत करना है।

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भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इस चरण में 12 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे। यह 2002-2005 के बाद पहला राष्ट्रव्यापी एसआईआर है।
27 अक्टूबर, 2025 को शुरू होने वाले इस चरण में 5.33 लाख बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और राजनीतिक दलों के 7 लाख से अधिक बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। गणना की अवधि 4 नवंबर से 4 दिसंबर, 2025 तक चलेगी।

शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
मुख्य तिथियाँ:
गणना (घर-घर जाकर): 4 नवंबर - 4 दिसंबर, 2025।
ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशन: 8-9 दिसंबर, 2025।
दावे और आपत्तियाँ दाखिल करना: 9 दिसंबर, 2025 - 8 जनवरी, 2026।
सुनवाई और सत्यापन: 9 दिसंबर, 2025 - 31 जनवरी, 2026।
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन: 7 फ़रवरी, 2026।
प्रक्रिया और आवश्यकताएँ: सभी मतदाताओं को नए गणना प्रपत्र जमा करने होंगे; जिनका नाम 2002-2005 की एसआईआर सूची में नहीं है, उन्हें पात्रता प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।
आधार का उपयोग पहचान सत्यापन के लिए किया जा सकता है, लेकिन नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं।
स्वीकार्य दस्तावेज़ों में आधार, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और शैक्षिक प्रमाण पत्र शामिल हैं।
अपवर्जन: चल रही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) प्रक्रिया और इसके विशिष्ट नागरिकता कानूनों के कारण असम को इस चरण से बाहर रखा गया है।
प्रशासनिक समन्वय: भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को राजनीतिक दलों को एसआईआर प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया है।
आयोग इस बात पर ज़ोर देता है कि चुनावी शुचिता और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया एक संवैधानिक कर्तव्य है।

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