2040 तक दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा यूनाइटेड किंगडम, जापान को पीछे छोड़ने का अनुमान
2040 तक दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा यूनाइटेड किंगडम, जापान को पीछे छोड़ने का अनुमान
लंदन। 26 दिसंबर 2025 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम (UK) आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2040 तक UK दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और इस दौरान वह जापान को पीछे छोड़ देगा। यह आकलन दीर्घकालिक आर्थिक पूर्वानुमानों पर आधारित है, जो आने वाले 15 वर्षों में UK की स्थिर और तुलनात्मक रूप से तेज़ आर्थिक वृद्धि की संभावना दर्शाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही UK को जनसांख्यिकीय बदलाव, उम्रदराज होती आबादी और सार्वजनिक वित्त से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, इसके बावजूद उसकी अर्थव्यवस्था कई अन्य विकसित देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि UK की लचीली आर्थिक संरचना और मजबूत सेवा क्षेत्र उसे दीर्घकालिक बढ़त प्रदान कर सकते हैं।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, UK की विकास यात्रा में उत्पादकता में सुधार एक अहम भूमिका निभाएगा। तकनीक के बढ़ते उपयोग, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से श्रम उत्पादकता में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और डेटा-आधारित सेवाओं में निवेश से अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि UK का सेवा क्षेत्र उसकी सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा। वित्तीय सेवाएं, बैंकिंग, बीमा, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्र देश की जीडीपी में बड़ा योगदान देते रहेंगे। खास तौर पर लंदन का वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थान UK को अंतरराष्ट्रीय पूंजी और निवेश आकर्षित करने में मदद करता रहेगा।
प्रौद्योगिकी और नवाचार भी UK की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख चालक माने जा रहे हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम, रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में बढ़ता निवेश और विश्वविद्यालयों से निकलने वाली उच्च कुशल प्रतिभा देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्नोलॉजी और पेशेवर सेवाओं का संयुक्त प्रभाव UK को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा।
वहीं, जापान की बात करें तो उसकी अर्थव्यवस्था को धीमी जनसंख्या वृद्धि, घटती कार्यबल संख्या और लंबे समय से चली आ रही कम आर्थिक वृद्धि जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं कारणों से अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दशकों में जापान की वैश्विक जीडीपी रैंकिंग में गिरावट आ सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि यह अनुमान कई अनिश्चितताओं पर निर्भर करता है। वैश्विक आर्थिक हालात, भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट और व्यापार नीतियों में बदलाव जैसे कारक UK की विकास गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर कर नीति, श्रम बाजार सुधार और सार्वजनिक निवेश की दिशा भी निर्णायक साबित होगी।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि यदि UK अपनी नीतिगत स्थिरता बनाए रखता है और उत्पादकता व नवाचार पर ध्यान केंद्रित करता है, तो 2040 तक दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना उसके लिए संभव है। यह उपलब्धि न केवल UK की आर्थिक शक्ति को दर्शाएगी, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत होगी।
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