अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ (शुल्क) ने भारत के हीरा उद्योग, विशेषकर सूरत के डायमंड हब, को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ (शुल्क) ने भारत के हीरा उद्योग, विशेषकर सूरत के डायमंड हब, को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन टैरिफ के चलते हीरे के निर्यात में भारी गिरावट आई है, जिससे उद्योग में काम करने वाले हजारों श्रमिकों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ा है। उद्योग संगठनों के अनुमान के मुताबिक, अब तक करीब 1 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं।
सूरत दुनिया का सबसे बड़ा हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र माना जाता है, जहां कुल वैश्विक हीरा पॉलिशिंग का लगभग 90% काम होता है। यहां का उद्योग मुख्य रूप से निर्यात पर निर्भर है, और अमेरिका इसके सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। लेकिन अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में आयातित हीरों पर टैरिफ बढ़ाने के बाद ऑर्डर में तेज गिरावट आई है।
हीरा कारोबारियों का कहना है कि टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी खरीदार अब वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार की प्रतिस्पर्धा कम हो गई है। इससे न केवल निर्यात कम हुआ है बल्कि उत्पादन भी घटाना पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप हजारों कारीगरों और पॉलिशिंग वर्करों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
स्थिति को देखते हुए कई यूनिट्स ने या तो अस्थायी रूप से अपना काम बंद कर दिया है या कर्मचारियों की संख्या घटा दी है। श्रमिकों के लिए यह समय बेहद कठिन है, क्योंकि अधिकांश का जीवन यापन पूरी तरह इस उद्योग पर निर्भर है। उद्योग से जुड़े लोग केंद्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत कर टैरिफ कम करवाने की कोशिश करे, साथ ही घरेलू स्तर पर सब्सिडी या राहत पैकेज उपलब्ध कराए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला तो यह संकट और गहरा सकता है, जिससे सूरत ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी हीरा उद्योग प्रभावित होगा।
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