चुनाव आयोग ने AI कंटेंट पर जारी किए सख्त दिशा-निर्देश: 3 घंटे में हटाना होगा भ्रामक कंटेंट

अक्टूबर 25, 2025 - 15:37
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चुनाव आयोग ने AI कंटेंट पर जारी किए सख्त दिशा-निर्देश: 3 घंटे में हटाना होगा भ्रामक कंटेंट

चुनाव आयोग ने AI कंटेंट पर जारी किए सख्त दिशा-निर्देश: 3 घंटे में हटाना होगा भ्रामक कंटेंट

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनाव प्रचार के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए जा रहे फर्जी और भ्रामक (डीपफेक) कंटेंट पर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि ऐसी सामग्री, विशेष रूप से जो किसी व्यक्ति की पहचान, स्वरूप या आवाज को गलत तरीके से पेश करती है, उसे संज्ञान में आने के 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।

हालांकि यह खबर पूरे देश में लागू होने वाले दिशा-निर्देशों से संबंधित है, लेकिन यह चुनाव प्रचार में बढ़ती AI तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

चुनाव आयोग के नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें:

  1. 3 घंटे में हटाना अनिवार्य: किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर यदि कोई अवैध, भ्रामक, या किसी व्यक्ति की पहचान को गलत तरीके से पेश करने वाली AI-जनरेटेड सामग्री पाई जाती है, तो शिकायत या संज्ञान में आने के तीन घंटे के भीतर उसे तत्काल हटाना होगा।

  2. स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य: AI या डिजिटल रूप से बनाई गई/परिवर्तित की गई किसी भी छवि, वीडियो या ऑडियो सामग्री पर प्रमुखता से 'AI-जनरेटेड', 'डिजिटली एन्हैंस्ड' या 'सिंथेटिक कंटेंट' जैसा लेबल लगाना अनिवार्य होगा।

    • दृश्य (Visual) सामग्री के लिए: यह लेबल स्क्रीन के ऊपर (टॉप बैंड) पर होना चाहिए और कम से कम 10% दृश्य क्षेत्र को कवर करना चाहिए।

    • ऑडियो सामग्री के लिए: यह अस्वीकरण (डिस्क्लेमर) रिकॉर्डिंग की शुरुआत के 10% अवधि तक मौजूद रहना चाहिए।

  3. सहमति आवश्यक: किसी भी व्यक्ति की आवाज़, चेहरा या पहचान को उसकी सहमति के बिना गलत तरीके से पेश करने वाली सामग्री को प्रकाशित या साझा करने की सख्त मनाही है, खासकर यदि यह मतदाताओं को गुमराह कर सकती हो।

  4. जनरेटर का नाम: AI-जनरेटेड सामग्री के मेटाडेटा या कैप्शन में सामग्री तैयार करने वाली इकाई का नाम स्पष्ट रूप से बताना होगा।

  5. रिकॉर्ड रखना: राजनीतिक दलों को अपने सभी AI-जनरेटेड प्रचार सामग्रियों का आंतरिक रिकॉर्ड (रिकॉर्ड बनाने वाले का विवरण और समय सहित) रखना होगा, जिसे चुनाव आयोग द्वारा मांगे जाने पर सत्यापन के लिए प्रस्तुत किया जा सके।

चुनाव आयोग ने कहा है कि AI से तैयार की जा रही 'हाइपर-रियलिस्टिक' सामग्री चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और मतदाताओं के भरोसे को दूषित कर रही है, जिसे रोकना लोकतंत्र की अखंडता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। ये दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और भविष्य के सभी आम और उपचुनावों पर लागू रहेंगे।

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