कोचिंग सिटी में बढ़ता वेप का धुआँ, युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा खतरा

जून 12, 2026 - 13:45
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कोचिंग सिटी में बढ़ता वेप का धुआँ, युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा खतरा

कोचिंग सिटी में बढ़ता वेप का धुआँ, युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा खतरा

विशेष संवाददाता

शाम के करीब छह बजे। शहर के एक कैफे में दोस्तों का समूह बैठा है। बातचीत के बीच अचानक रंगीन डिवाइस से धुएँ के बड़े-बड़े छल्ले निकलने लगते हैं। देखने वालों को यह सिर्फ एक नया फैशन लगता है, लेकिन डॉक्टरों और विशेषज्ञों की नजर में यह एक बढ़ती चिंता का विषय है। बात हो रही है वेप (Vape) की, जिसने पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के बीच तेजी से अपनी जगह बनाई है।

कभी सिगरेट को स्टाइल का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब उसकी जगह वेप ने ले ली है। छोटे आकार, आकर्षक डिज़ाइन और अलग-अलग फ्लेवर के कारण युवा इसे आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा समझ रहे हैं। कई छात्र इसे सामान्य धूम्रपान से कम नुकसानदायक मानते हैं, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस सोच को खतरनाक बताते हैं।

कैसे बढ़ रहा है चलन?

शहर के कई कैफे, हॉस्टल और युवाओं के मिलने-जुलने वाले स्थानों पर वेप का इस्तेमाल आसानी से देखा जा सकता है। कुछ युवाओं का कहना है कि उन्होंने इसकी शुरुआत दोस्तों के कहने पर की थी। शुरुआत में केवल जिज्ञासा थी, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत में बदल गई।

21 वर्षीय एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "पहले लगा कि यह सिर्फ मजे के लिए है। सिगरेट जैसी बदबू भी नहीं आती थी, इसलिए इसे सुरक्षित समझ लिया। अब कई बार बिना वेप के बेचैनी महसूस होती है।"

सेहत पर क्या पड़ रहा असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि वेप में मौजूद निकोटिन शरीर को धीरे-धीरे इसकी लत लगा देता है। लगातार उपयोग करने वाले युवाओं में सांस लेने में परेशानी, थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएँ देखने को मिल रही हैं।

फेफड़ा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, "वेप को सुरक्षित विकल्प समझना सबसे बड़ी भूल है। इसके धुएँ में मौजूद रसायन फेफड़ों को नुकसान पहुँचा सकते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।"

सोशल मीडिया भी बड़ी वजह

विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वेप को जिस तरह प्रस्तुत किया जाता है, उससे युवाओं पर प्रभाव पड़ता है। वीडियो और रील्स में इसे फैशन, स्टेटस और कूल लाइफस्टाइल से जोड़कर दिखाया जाता है। यही कारण है कि कई किशोर बिना जोखिम समझे इसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं।

अभिभावकों की बढ़ी चिंता

बदलते ट्रेंड ने अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई माता-पिता बताते हैं कि उन्हें लंबे समय तक पता ही नहीं चला कि उनके बच्चे वेप का इस्तेमाल कर रहे हैं। कारण यह है कि इसकी गंध सामान्य सिगरेट की तुलना में कम होती है और डिवाइस भी देखने में किसी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसी लगती है।

जागरूकता ही बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रतिबंध या कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों को मिलकर युवाओं को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना होगा। सही जानकारी और समय पर संवाद ही इस बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

वेप क्या है?

  • बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।

  • निकोटिन युक्त या अन्य रसायनों वाले लिक्विड को गर्म करता है।

  • उससे बनने वाली भाप को व्यक्ति सांस के जरिए शरीर में लेता है।

  • विभिन्न फ्लेवर और डिज़ाइन में उपलब्ध होता है।

क्यों हो रहा लोकप्रिय?

  • आकर्षक लुक और डिज़ाइन

  • सोशल मीडिया का प्रभाव

  • दोस्तों का दबाव

  • कम नुकसानदायक होने की गलत धारणा

  • आसानी से छिपाकर उपयोग करने की सुविधा

हाँ। यदि आप अपनी वेबसाइट के लिए इसी तरह की अख़बार-शैली की विशेष रिपोर्ट चाहते हैं, तो नीचे एक ओरिजिनल वेब-न्यूज़ फीचर दिया गया है। यह केवल प्रेरित शैली में लिखा गया है, कॉपी नहीं है।

शहर के युवाओं में बढ़ता ‘वेप’ का चलन: फैशन या खामोश खतरा?

विशेष रिपोर्ट | हेल्थ डेस्क

शहर के कैफे, कोचिंग हब और युवा समूहों में पिछले कुछ समय से एक नया ट्रेंड तेजी से दिखाई दे रहा है—वेपिंग। रंग-बिरंगे डिज़ाइन, आकर्षक फ्लेवर और सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता के कारण कई युवा इसे आधुनिक लाइफस्टाइल का हिस्सा मान रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत भविष्य में गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकती है। भारत में ई-सिगरेट और वेपिंग उत्पादों पर प्रतिबंध होने के बावजूद इनकी उपलब्धता को लेकर चिंताएं लगातार बनी हुई हैं। 

आखिर क्या है वेप?

वेप एक बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जो निकोटिन या अन्य रसायनों वाले तरल पदार्थ को गर्म करके एयरोसोल (भाप जैसी धुंध) में बदल देता है। उपयोगकर्ता इस धुंध को सांस के जरिए शरीर में लेता है। कई उत्पाद फलों, मिठाइयों और पेय पदार्थों जैसे फ्लेवर में उपलब्ध होते हैं, जिससे युवाओं के बीच इनकी लोकप्रियता बढ़ती है। 

युवाओं में क्यों बढ़ रहा आकर्षण?

विशेषज्ञों के अनुसार वेपिंग को अक्सर “कूल” या “स्टाइल स्टेटमेंट” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। सोशल मीडिया कंटेंट, दोस्तों का प्रभाव और यह धारणा कि वेप सामान्य सिगरेट से कम नुकसानदायक है, युवाओं को इसकी ओर आकर्षित करती है।

प्रमुख कारण

  • आकर्षक डिज़ाइन और फ्लेवर

  • सोशल मीडिया का प्रभाव

  • दोस्तों के बीच बढ़ता चलन

  • कम नुकसानदायक होने की गलत धारणा

  • आसानी से छिपाकर उपयोग करने की सुविधा

स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है?

चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश वेप उत्पादों में निकोटिन मौजूद होता है, जो अत्यधिक नशे की लत पैदा कर सकता है। लंबे समय तक उपयोग करने पर फेफड़ों, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ती चिंता, एकाग्रता की समस्या और निकोटिन निर्भरता को भी इससे जोड़ा है। 

प्रतिबंध के बावजूद उपलब्धता

भारत सरकार ने 2019 में ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात, वितरण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद कई रिपोर्टों में सामने आया है कि कुछ स्थानों पर ये उत्पाद अनौपचारिक नेटवर्क और ऑनलाइन माध्यमों से युवाओं तक पहुंच रहे हैं। 

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। कई किशोर और युवा यह नहीं जानते कि वेपिंग उत्पाद भारत में प्रतिबंधित हैं या इनके संभावित स्वास्थ्य जोखिम क्या हो सकते हैं। इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

क्या करें अभिभावक?

  • बच्चों से खुलकर बातचीत करें।

  • अचानक व्यवहार परिवर्तन पर ध्यान दें।

  • निकोटिन और वेपिंग के जोखिमों के बारे में जानकारी दें।

  • सोशल मीडिया पर दिखने वाले ट्रेंड्स की समझ विकसित करें।

  • आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।

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