स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदली, लेकिन एनीमिया और कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती

जून 13, 2026 - 17:19
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स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदली, लेकिन एनीमिया और कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदली, लेकिन एनीमिया और कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती

कोटा संभाग में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, संस्थागत प्रसव और टीकाकरण में सुधार के बावजूद महिलाओं और बच्चों में पोषण संबंधी समस्याएं चिंता का विषय

कोटा। राजस्थान के कोटा संभाग में पिछले एक दशक के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सरकारी योजनाओं, चिकित्सा संस्थानों के विस्तार, टीकाकरण अभियानों और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के प्रभाव से आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है। संस्थागत प्रसवों की संख्या में वृद्धि हुई है, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ा है। इसके बावजूद महिलाओं और बच्चों में एनीमिया तथा कुपोषण की समस्या अभी भी गंभीर चुनौती बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ पोषण, जागरूकता और सामाजिक व्यवहार में सुधार पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि इन मुद्दों पर प्रभावी कार्य नहीं किया गया तो स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों का पूरा लाभ समाज को नहीं मिल पाएगा।

संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी

जननी सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना और अन्य सरकारी प्रयासों के कारण अस्पतालों में प्रसव कराने की प्रवृत्ति बढ़ी है। पहले जहां बड़ी संख्या में महिलाएं घर पर प्रसव कराती थीं, वहीं अब अधिकांश गर्भवती महिलाएं अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता दे रही हैं।

कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव सेवाओं का विस्तार हुआ है। इससे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आई है और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि संस्थागत प्रसवों में वृद्धि मातृ स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

टीकाकरण अभियान का सकारात्मक प्रभाव

कोटा संभाग में नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन से बच्चों में कई गंभीर बीमारियों के मामलों में कमी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों, आशा सहयोगिनियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई है।

टीकाकरण कवरेज में सुधार के कारण खसरा, पोलियो और अन्य संक्रामक रोगों के नियंत्रण में सफलता मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर टीकाकरण बच्चों को स्वस्थ जीवन देने की दिशा में सबसे प्रभावी उपायों में से एक है।

स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से गरीबों को राहत

मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की है। गंभीर बीमारियों के उपचार पर होने वाला खर्च अब कई परिवारों के लिए कम बोझ साबित हो रहा है।

स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को निजी और सरकारी अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिली है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है और गरीब वर्ग के लोगों का भरोसा चिकित्सा व्यवस्था पर मजबूत हुआ है।

एनीमिया की समस्या बनी गंभीर चिंता

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बावजूद महिलाओं और बच्चों में एनीमिया की समस्या चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण संतुलित एवं पौष्टिक आहार की कमी, आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सीमित उपयोग और पोषण संबंधी जागरूकता का अभाव है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़े भी संकेत देते हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे रक्ताल्पता से प्रभावित हैं। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया न केवल मां के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि नवजात शिशु के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

चिकित्सकों का कहना है कि आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन, हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों, गुड़ और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का उपयोग बढ़ाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

कुपोषण की चुनौती बरकरार

कोटा संभाग में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बावजूद कुपोषण की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर कुपोषण का प्रभाव अभी भी देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार गरीबी, अशिक्षा, पोषण संबंधी जानकारी का अभाव और भोजन में विविधता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों और पोषण अभियानों के माध्यम से स्थिति में सुधार का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी तक प्राप्त नहीं हो पाए हैं।

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही संतुलित आहार उपलब्ध कराया जाए तो कुपोषण के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

बाल विवाह में कमी, लेकिन समस्या समाप्त नहीं

कोटा संभाग में बाल विवाह की घटनाओं में पहले की तुलना में कमी आई है। शिक्षा के प्रसार, सरकारी जागरूकता अभियानों और सामाजिक संगठनों के प्रयासों का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

हालांकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की घटनाएं अभी भी सामने आती हैं। कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह रोकने के लिए शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर

स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में शहरी क्षेत्रों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि कई ग्रामीण इलाकों में अभी भी चिकित्सकों की कमी, संसाधनों का अभाव और जागरूकता की कमी जैसी समस्याएं मौजूद हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इससे ग्रामीण आबादी को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

जनजागरूकता सबसे बड़ा हथियार

विशेषज्ञों का मानना है कि एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और व्यापक जनजागरूकता जरूरी है।

लोगों को पौष्टिक भोजन, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक करना होगा। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से निरंतर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

कोटा संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। संस्थागत प्रसव बढ़े हैं, टीकाकरण बेहतर हुआ है और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं ने आम लोगों को राहत दी है। लेकिन महिलाओं और बच्चों में एनीमिया तथा कुपोषण जैसी समस्याएं अभी भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ पोषण, शिक्षा और जागरूकता पर समान रूप से ध्यान देकर ही स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है। यदि सरकार, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर प्रयास करें तो आने वाले वर्षों में कोटा संभाग स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में और बेहतर उपलब्धियां हासिल कर सकता है।

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