भारत-EU Free Trade Agreement (FTA): जोरदार प्रगति
1. भारत-EU Free Trade Agreement (FTA): जोरदार प्रगति
• वार्ता की रफ्तार बढ़ी
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने FTA वार्ताओं को तेज़ करने का निर्णय लिया है। इस सप्ताह दिल्ली में 13वां दौर शुरू हो चुका है, वहीं अगले महीने ब्रुसेल्स में 14वां दौर होगा। दोनों ओर से वर्ष-अंत तक समझौता करने का लक्ष्य स्पष्ट है।
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EU के व्यापार आयुक्त मारोस सेफ़कोंविक जल्द ही तीन दिन के लिए दिल्ली आएंगे, जिससे वार्ता में और गति आएगी।• राजनीतिक स्तर पर समर्थन
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वार्ताओं के शीघ्र समापन की उम्मीद जताई है और इसे “ambitious and balanced” समझौता बताया है।
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प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने 2025 के अंत तक FTA पर सहमति का संदेश दिया है।
• जमीनी प्रगति और चुनौतियाँ
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लगभग 20 अध्यायों में से 8 (जैसे कस्टम्स, ट्रेड फैसिलिटेशन) पर समझौता हो गया है; संवेदनशील क्षेत्र जैसे डेयरी, चावल अभी मुद्दे बने हुए हैं।
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जर्मनी से भी भारत ने सहयोग की उम्मीद जताई है ताकि कार, डेयरी समेत बाकी मुद्दों में समझौता आसान हो सके।
इसके अलावा EU की उच्च पर्यावरण मानकों (जैसे CBAM) को लेकर भारत को चिंताएँ हैं—कहा जा रहा है कि ये भारी लागत ला सकते हैं।
2. भारत-तालिबान-अफ़ग़ानिस्तान संबंध: संबंधों में विस्तार की झलक
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जनवरी 2025 में, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और तालिबान के अमीर खान मुत्ताक़ी के बीच दुबई में उच्च स्तर की बातचीत हुई—यह भारत-तालिबान के बीच सर्वाधिक स्तर का संपर्क है।
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इस बातचीत में स्वास्थ्य, मानवीय राहत, चाबहार पोर्ट के इस्तेमाल और विकास परियोजनाओं पर चर्चा हुई। तालिबान ने भारत को "महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार" करार देते हुए संबंधों को आगे बढ़ाने का इरादा जाहिर किया।
• संभावित आगे की रणनीति
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वर्तमान में भारत तालिबान नेतृत्व वाले अफ़ग़ानिस्तान में وزير स्तरीय दौरे के विकल्प पर विचार कर रहा है; तालिबान ने इस प्रस्ताव को सकारात्मक तरीके से देखा है, जिससे द्विपक्षीय संपर्क की संभावनाएं बढ़ी हैं।
भारत यूरोपीय संघ के साथ FTA समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 2025 वर्ष-अंत के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके तहत अब तक 13 दौर की वार्ता दिल्ली में हो गई है और 14वां अक्टूबर में ब्रुसेल्स में होने वाला है। विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे “ambitious and balanced” समझौता करार देते हुए शीघ्र समापन की उम्मीद जताई है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी एवं यूरोपीय नेताओं ने इस पहल को लोकतांत्रिक और आपसी विश्वास पर आधारित “natural and organic” साझेदारी बताया।
अभी तक लगभग 8 महत्वपूर्ण वार्तालाप अध्यायों (customs, trade facilitation इत्यादि) पर सहमति बन चुकी है, वहीं संवेदनशील फसल और डेयरी जैसे क्षेत्र वजूद में रहे हैं। पर्यावरणीय नियम (CBAM) और कार जैसे उद्योगों पर EU की मांगों ने जमीनी स्तर पर जटिलताएं पैदा की हैं। जर्मनी और अन्य यूरोपीय नेताओं ने इस वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाकर सहयोग का भरोसा दिया है।
वहीं दूसरी ओर, भारत-अफ़ग़ानिस्तान संबंधों में तालिबान नेतृत्व वाली फोकस्ड रणनीतिक संवाद की शुरुआत हुई है। जनवरी 2025 में दुबई में हुई मीटिंग में विकास, स्वास्थ्य, चाबहार पोर्ट और मानवीय सहायता पर चर्चा हुई। तालिबान ने भारत को “महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार” बताते हुए संबंधों की गहराई को इंगित किया है। वर्तमान में मंत्रीस्तरीय दौरे जैसे विकल्पों पर विचार चल रहा है, जो इस रणनीतिक दिशा में आगे बढ़ने की स्पष्ट संकेत है।
कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि भारत समृद्ध वैश्विक और क्षेत्रीय साझेदारियों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है—जिसमें EU-ट्रेड, तकनीक और रणनीतिक सहयोग से लेकर अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता और विकास हितों को जोड़ने का व्यापक प्रयास शामिल है।
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