मिडिल-ईस्ट तनाव का असर भारत पर, तेल और LNG सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
मिडिल-ईस्ट तनाव का असर भारत पर, तेल और LNG सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके चलते ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशकों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल-ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता है। हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ी तनातनी के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश की लगभग 80 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल की जरूरत विदेशों से आयात की जाती है। ऐसे में यदि मिडिल-ईस्ट क्षेत्र में हालात बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही LNG सप्लाई में भी बाधा आने की स्थिति में बिजली उत्पादन और उद्योगों पर असर पड़ सकता है।
वित्तीय बाजारों में भी इस तनाव का प्रभाव देखा गया है। शेयर बाजार में ऊर्जा, परिवहन और विमानन क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। निवेशकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबा चलता है तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि सरकार और ऊर्जा कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते किए हुए हैं। इसके अलावा देश के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी मौजूद हैं, जिनका उपयोग आपातकालीन स्थिति में किया जा सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से अपने आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है। रूस, अमेरिका और अन्य देशों से भी तेल और गैस की खरीद बढ़ाई गई है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके।
इस बीच सरकार ने कहा है कि फिलहाल देश में तेल और गैस की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं। आने वाले दिनों में मिडिल-ईस्ट की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा इस बात को तय करेगी कि भारत पर इसका कितना असर पड़ता है।
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