असम में अवैध विदेशियों की पहचान और निष्कासन

फ़रवरी 19, 2026 - 13:17
फ़रवरी 25, 2026 - 13:40
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असम में अवैध विदेशियों की पहचान और निष्कासन

असम में अवैध विदेशियों की पहचान और निष्कासन को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में महत्वपूर्ण आँकड़े साझा किए हैं। असम समझौता कार्यान्वयन मंत्री Atul Bora ने 18 फरवरी 2026 को बताया कि 1985 में हस्ताक्षरित Assam Accord के प्रावधानों के तहत अब तक 1.70 लाख से अधिक अवैध विदेशियों की पहचान की जा चुकी है।

समझौते के अनुसार 25 मार्च 1971 या उसके बाद असम में प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान और कार्रवाई का प्रावधान है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार 1,37,152 लोग 1971 के बाद राज्य में दाखिल हुए पाए गए, जबकि 33,485 लोग 1966 से 1971 के बीच आए थे। यह पूरी प्रक्रिया असम समझौते की धारा के अनुरूप चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य राज्य की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना है।

पिछले चार दशकों में लगभग 31,000 लोगों को वापस भेजा या निर्वासित किया गया है। इनमें 1985 से मार्च 2013 के बीच “पुश बैक” प्रक्रिया के तहत 29,663 लोगों को प्रत्यावर्तित किया गया। मार्च 2013 से जनवरी 2026 के बीच 468 लोगों को निर्वासित किया गया, जिनमें 458 दोषसिद्ध विदेशी और 10 घोषित विदेशी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 1 फरवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच गृह मंत्रालय के आदेश पर 1,421 लोगों को वापस भेजा गया। वहीं 20 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच Immigrants (Expulsion from Assam) Act, 1950 के तहत 52 लोगों को निष्कासित किया गया।

सीमा प्रबंधन भी राज्य सरकार की प्राथमिकता में है। असम में भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल 267.5 किलोमीटर लंबाई में से 228.541 किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है। हालांकि श्रीभूमि जिले में 4.35 किलोमीटर का हिस्सा बांग्लादेश सीमा रक्षक बल की आपत्तियों के कारण अभी शेष है। नदी क्षेत्रों में निगरानी के लिए सीमा सुरक्षा बल द्वारा Border Security Force के माध्यम से Comprehensive Integrated Border Management System (CIBMS) लागू किया गया है, जिससे आधुनिक तकनीक के जरिए चौकसी बढ़ाई गई है।

राज्य सरकार असम समझौते की धारा 6 को भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें असम के लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा का प्रावधान है। इस संबंध में न्यायमूर्ति बिप्लब शर्मा समिति की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। Justice Biplab Sharma समिति की 67 सिफारिशों में से 52, जो राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, पर अमल शुरू हो चुका है, जबकि शेष 15 सिफारिशें केंद्र सरकार के अधीन हैं।

सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य राज्य में अवैध प्रवास की समस्या पर नियंत्रण के साथ-साथ असम की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक पहचान की रक्षा करना है। विपक्ष ने हालांकि कुछ प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और मानवीय पहलुओं पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सभी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।

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