जापान ने दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र फिर से किया शुरू, फुकुशिमा के बाद ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक मोड़

जनवरी 21, 2026 - 17:38
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जापान ने दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र फिर से किया शुरू, फुकुशिमा के बाद ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक मोड़

जापान ने दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र फिर से किया शुरू, फुकुशिमा के बाद ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक मोड़

जापान ने अपनी ऊर्जा नीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र काशीवाज़ाकी-कारीवा (Kashiwazaki-Kariwa) को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (TEPCO) ने 21 जनवरी 2026 को इस विशाल परमाणु संयंत्र के पहले रिएक्टर को चालू करने की औपचारिक तैयारी आरंभ की। यह फैसला 2011 की विनाशकारी फुकुशिमा परमाणु आपदा के लगभग 15 साल बाद लिया गया है, जिसे जापान के परमाणु इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

काशीवाज़ाकी-कारीवा परमाणु संयंत्र जापान की राजधानी टोक्यो से करीब 220 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में निइगाता प्रांत में स्थित है। यह संयंत्र अपनी क्षमता के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्र है। इसमें कुल 7 रिएक्टर हैं और इसकी कुल उत्पादन क्षमता 8.2 गीगावॉट है, जो लाखों घरों की बिजली जरूरतें पूरी करने में सक्षम है। पहले चरण में 1.36 गीगावॉट क्षमता वाले एक रिएक्टर को शुरू किया जा रहा है, जबकि दूसरे रिएक्टर को 2030 तक चालू करने की योजना बनाई गई है।

जापान सरकार ने 22 दिसंबर 2025 को इस संयंत्र को फिर से शुरू करने का फैसला लिया था। इसके पीछे बढ़ती ऊर्जा मांग, महंगे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की रणनीति को प्रमुख कारण माना जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बाद जापान जैसे देशों पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने का दबाव लगातार बढ़ा है।

TEPCO, जो फुकुशिमा आपदा के समय भी संयंत्र का संचालन कर रही थी, ने इस बार सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का दावा किया है। कंपनी ने गारंटी दी है कि फुकुशिमा जैसी दुर्घटना दोबारा नहीं होगी। TEPCO ने अगले 10 वर्षों में लगभग 100 अरब येन के निवेश का वादा किया है, जिसमें उन्नत सुरक्षा प्रणालियां, भूकंप और सुनामी से बचाव के उपाय, और आपातकालीन प्रबंधन ढांचे को मजबूत करना शामिल है।

हालांकि, सरकार और TEPCO के आश्वासनों के बावजूद स्थानीय लोगों में गहरी चिंता बनी हुई है। अक्टूबर 2025 में किए गए एक सर्वे के अनुसार, करीब 60 प्रतिशत स्थानीय निवासियों का मानना है कि संयंत्र को दोबारा शुरू करने के लिए जरूरी सभी सुरक्षा शर्तें पूरी नहीं हुई हैं। वहीं, लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने TEPCO पर भरोसा न होने की बात कही है। कई नागरिक समूहों और पर्यावरण संगठनों ने संयंत्र के पुनः संचालन का विरोध भी किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि काशीवाज़ाकी-कारीवा संयंत्र का पुनः संचालन जापान की ऊर्जा नीति को नई दिशा देगा, लेकिन यह फैसला सामाजिक विश्वास और पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा भी है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि जापान सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाता है और क्या वह फुकुशिमा की यादों से उबरकर परमाणु ऊर्जा पर जनता का भरोसा फिर से कायम कर पाता है।

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