डॉलर के मुकाबले संभलता दिखा भारतीय रुपया, बाजार में लौटा सतर्क सकारात्मक माहौल

दिसम्बर 23, 2025 - 16:20
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डॉलर के मुकाबले संभलता दिखा भारतीय रुपया, बाजार में लौटा सतर्क सकारात्मक माहौल

डॉलर के मुकाबले संभलता दिखा भारतीय रुपया, बाजार में लौटा सतर्क सकारात्मक माहौल

नई दिल्ली।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में रहने के बाद भारतीय रुपया अब संभलता हुआ नजर आ रहा है। हालिया कारोबारी सत्रों में आई गिरावट के बाद रुपये में आई मजबूती से वित्तीय बाजारों में हल्का उत्साह देखने को मिला है। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में रुपया स्थिरता की ओर बढ़ सकता है, बशर्ते वैश्विक और घरेलू संकेत अनुकूल बने रहें।

शुक्रवार को भारतीय रुपया 24 पैसे मजबूत होकर 89.96 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इससे पहले के कारोबारी सत्र में यह 90.20 के स्तर पर बंद हुआ था, जो रुपये के लिए एक मनोवैज्ञानिक दबाव वाला स्तर माना जा रहा था। वहीं सोमवार को रुपये ने और मजबूती दिखाते हुए 22 पैसे की बढ़त के साथ 89.45 प्रति डॉलर पर कारोबार की शुरुआत की। इस बढ़त ने संकेत दिया कि बाजार में रुपये को लेकर नकारात्मकता कुछ हद तक कम हो रही है।

आज, मंगलवार 23 दिसंबर 2025 को रुपये की चाल पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है। हालांकि आज के लिए रुपये के अंतिम बंद भाव की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती संकेतों से यह स्पष्ट है कि लगातार गिरावट के बाद रुपये में सुधार के संकेत उभर रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिरता ने आयातकों और निर्यातकों दोनों को थोड़ी राहत दी है।

विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की मजबूती के पीछे कई अहम कारक काम कर रहे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप की भूमिका मानी जा रही है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए डॉलर की आपूर्ति बढ़ाकर बाजार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। इसके अलावा घरेलू शेयर बाजारों में आई तेजी ने भी रुपये को सहारा दिया है।

सोमवार को शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। बाजार जानकारों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से की गई खरीदारी ने भी इस तेजी को बल दिया। एफआईआई प्रवाह का सीधा असर रुपये पर पड़ता है, क्योंकि इससे डॉलर की मांग कम होती है और रुपये को मजबूती मिलती है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता भी रुपये के लिए एक सकारात्मक संकेत रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव बढ़ता है। फिलहाल तेल कीमतों में बड़ी उथल-पुथल नहीं होने से रुपये को राहत मिली है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण रुपये की राह आगे भी आसान नहीं होगी। डॉलर की वैश्विक मजबूती और विदेशी बाजारों में अस्थिरता का असर रुपये पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, भारतीय रुपया फिलहाल गिरावट के दौर से बाहर निकलकर संभलता हुआ दिखाई दे रहा है। यह मजबूती भले ही सीमित हो, लेकिन इससे बाजार में भरोसा लौटा है। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू आर्थिक संकेतक कितने मजबूत रहते हैं और वैश्विक बाजारों में स्थिरता कितनी बनी रहती है।

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