दिल्ली-एनसीआर में फिर बिगड़ी हवा, AQI ‘खतरनाक’ और ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंचा
दिल्ली-एनसीआर में फिर बिगड़ी हवा, AQI ‘खतरनाक’ और ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंचा
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एक बार फिर वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब हो गई है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है, जिसे ‘खतरनाक’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है। इस स्थिति ने आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है और प्रशासन व डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के वजीरपुर इलाके में AQI 591 दर्ज किया गया, जो बेहद खतरनाक स्तर को दर्शाता है। वहीं ITI शाहदरा में AQI 495, गाजियाबाद के वसुंधरा क्षेत्र में 455 और नोएडा के सेक्टर-62 में 434 रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा नोएडा के सेक्टर-125 में AQI 414 और कुछ अन्य इलाकों में यह 443 तक पहुंच गया। गाजियाबाद में औसत AQI 392 दर्ज किया गया, जबकि गुरुग्राम में भी हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली में स्थिति और भी चिंताजनक नजर आ रही है। राजधानी के 39 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 20 केंद्रों पर AQI ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच चुका है। इनमें आनंद विहार, वजीरपुर, रोहिणी और अक्षरधाम जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की मौजूदा परिस्थितियां प्रदूषण को और बढ़ा रही हैं। ठंड, कोहरा और हवा की कम रफ्तार के कारण प्रदूषक कण वातावरण में स्थिर हो गए हैं और ऊपर उठकर फैल नहीं पा रहे हैं। इससे हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है, जो सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह को प्रभावित करते हैं।
डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस, दिल व फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोग घर से बाहर निकलने से बचें, जरूरत पड़ने पर ही बाहर जाएं और एन-95 या समकक्ष मास्क का इस्तेमाल करें। साथ ही, सुबह-शाम की सैर और खुले में व्यायाम फिलहाल टालने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इस तरह की प्रदूषित हवा में सांस लेना अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और यहां तक कि समय से पहले मृत्यु के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का कम उपयोग करें, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करें और प्रदूषण कम करने में सहयोग दें।
कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। जब तक मौसम में बदलाव या ठोस नियंत्रण उपाय नहीं होते, तब तक लोगों को स्वयं सतर्क रहकर अपने स्वास्थ्य की रक्षा करनी होगी।
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