जयपुर/जोधपुर/कोटा। राजस्थान के तीन प्रमुख नगर निगमों में शुक्रवार को महापौर पद के चुनाव
जयपुर/जोधपुर/कोटा। राजस्थान के तीन प्रमुख नगर निगमों में शुक्रवार को महापौर पद के चुनाव के साथ शहरों की नई स्थानीय राजनीतिक कमान तय हो गई। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। जयपुर में सुनील कोठारी, जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता और कोटा में अनुसुईया गोस्वामी निर्वाचित हुईं। तीनों जगह भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला था। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना की गई और परिणाम घोषित किए गए।
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार तीनों नगर निगमों में महापौर पद के लिए मतदान 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कराया गया। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू हुई। इन चुनावों का कार्यक्रम पहले स्थगित किया गया था, क्योंकि कुछ वार्डों में ईवीएम से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण पुनर्मतदान कराना पड़ा था। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर, जोधपुर और कोटा समेत संबंधित निकायों में महापौर चुनाव के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की थी।
जयपुर में सुनील कोठारी बने नए महापौर
राजधानी जयपुर में महापौर पद के लिए भाजपा ने वार्ड 112 के पार्षद सुनील कोठारी को मैदान में उतारा था, जबकि कांग्रेस की ओर से वार्ड 118 की पार्षद सुनीता गुप्ता मावर प्रत्याशी थीं। जयपुर नगर निगम में कुल 150 पार्षद हैं और बहुमत के लिए 76 वोट जरूरी थे। चुनाव से पहले भाजपा के पास 78 पार्षद, कांग्रेस के पास 57 और 15 निर्दलीय पार्षद थे।
मतदान के दौरान जयपुर नगर निगम मुख्यालय के बाहर राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। कांग्रेस विधायक रफीक खान को निगम परिसर में प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद उन्होंने पार्षदों के साथ निगम गेट पर धरना दिया। दूसरी ओर दोनों दलों के प्रत्याशी अपने-अपने समर्थन को लेकर आश्वस्त नजर आए।
मतगणना के बाद सुनील कोठारी को विजेता घोषित किया गया। उपलब्ध परिणाम के अनुसार कोठारी को कुल 89 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मावर को 60 वोट प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा प्रत्याशी ने बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक समर्थन हासिल किया।
जयपुर नगर निगम में अब नए महापौर के सामने शहर की सफाई व्यवस्था, यातायात, सड़क, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और शहरी विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। महापौर चुनाव के बाद अब निगम की राजनीति का अगला महत्वपूर्ण चरण उपमहापौर के चुनाव का होगा।
जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता की जीत
जोधपुर नगर निगम में महापौर पद के लिए भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता को प्रत्याशी बनाया था। वे वार्ड 82 से निर्वाचित पार्षद हैं। कांग्रेस ने उनके सामने राजेंद्र सिंह सोलंकी को उम्मीदवार बनाया। सोलंकी हालिया नगर निगम चुनाव में पार्षद का चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें महापौर पद के लिए मैदान में उतारा।
जोधपुर नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। चुनाव से पहले भाजपा के पास 45 पार्षद और कांग्रेस के पास 44 पार्षद थे। बहुमत के लिए 51 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। चुनाव से पहले भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था, जिससे उसका समर्थन 52 तक पहुंचने की बात सामने आई थी।
महापौर चुनाव से पहले दोनों प्रत्याशियों के नामांकन को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रही थीं। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के नामांकन पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने दोनों आपत्तियों को खारिज कर दिया और दोनों प्रत्याशियों का नामांकन वैध माना गया। इसके बाद 25 सितंबर को सीधा मुकाबला हुआ।
मतदान और मतगणना के बाद भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता को जोधपुर का नया महापौर घोषित किया गया। इसके साथ ही जोधपुर नगर निगम की स्थानीय सत्ता में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। अब नए महापौर के सामने जोधपुर जैसे बड़े शहर में सड़क, सफाई, जल व्यवस्था, यातायात, सीवरेज, पर्यटन क्षेत्र और शहरी आधारभूत ढांचे से जुड़े मुद्दों को लेकर काम करने की चुनौती रहेगी।
कोटा में अनुसुईया गोस्वामी की बड़ी जीत
हाड़ौती के प्रमुख शहर कोटा में महापौर पद का चुनाव भी खासा महत्वपूर्ण रहा। यहां भाजपा ने अनुसुईया गोस्वामी को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस की ओर से सुनीता सुमन मैदान में थीं। कोटा नगर निगम में कुल 100 पार्षद हैं। चुनाव से पहले भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद थे। बहुमत के लिए 51 वोट आवश्यक थे।
मतदान के बाद सामने आए परिणाम में अनुसुईया गोस्वामी ने 65 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। इस तरह गोस्वामी ने 30 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
अनुसुईया गोस्वामी की जीत के साथ कोटा नगर निगम को नई महिला महापौर मिली है। उनके सामने शहर के तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती होगी। कोटा देशभर में शिक्षा और कोचिंग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है, इसलिए यहां यातायात व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, सड़कों, पार्किंग, सीवरेज, सार्वजनिक सुविधाओं और शहर के सौंदर्यीकरण जैसे मुद्दे नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
चुनाव परिणाम के बाद नगर निगम परिसर में समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। अनुसुईया गोस्वामी ने महापौर पद का कार्यभार संभालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।
तीनों शहरों में भाजपा की जीत
जयपुर, जोधपुर और कोटा के परिणामों को एक साथ देखा जाए तो तीनों प्रमुख नगर निगमों में भाजपा के प्रत्याशियों ने महापौर पद पर जीत दर्ज की है। यह परिणाम ऐसे समय आया है जब राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के बाद स्थानीय निकायों में अध्यक्ष और महापौर पदों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी।
इन तीनों चुनावों में आम मतदाताओं ने सीधे महापौर के लिए मतदान नहीं किया। महापौर का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया गया। इसलिए वार्ड चुनाव के बाद बने पार्षदों के संख्या समीकरण, निर्दलीय पार्षदों का समर्थन और मतदान के दौरान वास्तविक वोटिंग महत्वपूर्ण रही।
अब महापौरों के सामने चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर शहरों के रोजमर्रा के नागरिक मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। जयपुर में राजधानी की बढ़ती आबादी और यातायात दबाव, जोधपुर में आधारभूत सुविधाओं और विरासत शहर की जरूरतों तथा कोटा में तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र और शिक्षा हब से जुड़ी नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान अपेक्षित रहेगा।
तीनों नगर निगमों में नए महापौरों के निर्वाचन के साथ स्थानीय निकाय राजनीति का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई नगर निगम समितियां किस तरह गठित होती हैं, उपमहापौर कौन बनते हैं और आने वाले समय में शहरों के विकास से जुड़े मुद्दों पर नगर निगम किस दिशा में काम करता है।
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