होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हमलों के बाद अजित डोभाल की ईरान के सुरक्षा प्रमुख से बातचीत

अक्टूबर 13, 2026 - 15:22
 0  1
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हमलों के बाद अजित डोभाल की ईरान के सुरक्षा प्रमुख से बातचीत

होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हमलों के बाद अजित डोभाल की ईरान के सुरक्षा प्रमुख से बातचीत

राष्ट्रीय समाचार | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार से जुड़े सुरक्षा संकट के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव डॉ. मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की। यह वार्ता सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 की शाम हुई। ईरानी दूतावास की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा भारत और ईरान के पारस्परिक हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल ही में भारतीय चालक दल वाले दो व्यापारिक जहाजों से जुड़ी घटनाओं में भारतीय नाविकों के लापता होने और जहाज में आग लगने की खबर सामने आई थी। ऐसे में भारत और ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के बीच संपर्क को क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, दोनों अधिकारियों की बातचीत में जहाजों से जुड़ा मुद्दा औपचारिक रूप से उठाया गया या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई के बीच क्या हुई बातचीत?

ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी जानकारी में बताया कि डॉ. मोहसिन रेजाई ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया सहित क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

हालांकि, बातचीत के विस्तृत एजेंडे, किसी संभावित समझौते या भविष्य की संयुक्त कार्रवाई के बारे में आधिकारिक बयान में जानकारी नहीं दी गई। भारत सरकार की ओर से भी बातचीत के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि दोनों देशों ने किसी विशेष समुद्री सुरक्षा समझौते पर सहमति बना ली है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी इस बात की पुष्टि करती है कि दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के बीच संपर्क हुआ और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचार साझा किए गए।

भारत और ईरान के बीच सुरक्षा संवाद का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि पश्चिम एशिया की स्थिति का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों से जुड़ी घटनाएं

अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई के बीच बातचीत से एक दिन पहले, 11 अक्टूबर को भारतीय चालक दल वाले दो वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी घटनाएं सामने आई थीं।

पहली घटना निकारागुआ के झंडे वाले तेल उत्पाद टैंकर MT Petro Dolphin से संबंधित थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के सोहार क्षेत्र के पास इस जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ। जहाज पर 11 भारतीय नाविक सवार थे। घटना के बाद दो भारतीय नाविकों के लापता होने की जानकारी दी गई, जबकि अन्य चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए गए।

दूसरी घटना मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले टैंकर MT Valthera से जुड़ी थी। इस जहाज पर भी 11 भारतीय नाविक सवार थे। जहाज को एक अज्ञात प्रक्षेप्य से नुकसान पहुंचने के बाद आग लगने की खबर आई। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज पर सवार सभी 11 भारतीय नाविक सुरक्षित थे।

इन घटनाओं ने क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारतीय अधिकारियों ने नाविकों की सुरक्षा और लापता लोगों की तलाश के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय की जानकारी दी है।

भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा की

भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को लेकर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने समुद्री व्यापार, नाविकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

भारत के लिए यह मुद्दा केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र से भारत को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति होती है और इस क्षेत्र से होकर बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार गुजरता है। ऐसे में समुद्री मार्गों में अस्थिरता से तेल एवं गैस की आपूर्ति, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं।

भारत ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने और विवादों के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति पर जोर दिया है। समुद्री मार्गों पर नागरिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के परिवहन के लिए प्रमुख मार्गों में शामिल है।

खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले अनेक ऊर्जा संसाधन इसी समुद्री रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इस मार्ग की सुरक्षा और स्थिरता विशेष महत्व रखती है।

यदि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है। लंबे समय तक तनाव बने रहने की स्थिति में ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था पर भी दबाव पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि समुद्री यातायात कितना प्रभावित होता है और संकट कितने समय तक जारी रहता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के कारण भारत को अपने समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशों में मौजूद नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखनी पड़ती है।

भारत-ईरान संबंधों में सुरक्षा संवाद का महत्व

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े विषयों पर संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझने और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का माध्यम है।

वर्तमान परिस्थितियों में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। भारत को एक ओर अपने नागरिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना भी आवश्यक है।

अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई के बीच हुई बातचीत इसी व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस संपर्क से किसी विशेष समझौते या तनाव में तत्काल कमी आने का निष्कर्ष निकालने के लिए अभी पर्याप्त आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

आगे की स्थिति पर भारत की नजर

समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं के बाद भारतीय एजेंसियां संबंधित अधिकारियों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही हैं। लापता नाविकों की स्थिति, जहाजों को हुए नुकसान और क्षेत्र में समुद्री आवाजाही से जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्षेत्रीय तनाव कम होता है या नहीं और वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के क्या कदम उठाए जाते हैं। भारत के लिए अपने नाविकों की सुरक्षा, समुद्री व्यापार की निरंतरता और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता प्रमुख प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।

निष्कर्ष: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई के बीच 12 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। ईरानी दूतावास के अनुसार, दोनों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा साझा हितों पर चर्चा की। यह संपर्क होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भारतीय चालक दल वाले जहाजों से जुड़ी घटनाओं के बीच हुआ है। हालांकि, बातचीत में जहाजों पर हुए हमलों को लेकर क्या विशेष चर्चा हुई, इस बारे में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow