सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिवों को निर्देश दिया है

अगस्त 13, 2025 - 16:16
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सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिवों को निर्देश दिया है

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिवों को निर्देश दिया है कि वे उन कैदियों की पहचान करें और उन्हें तुरंत रिहा करें जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही या अन्य कारणों से अभी भी जेल में बंद हैं। अदालत ने इस स्थिति को “गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन” बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को तय अवधि से एक दिन भी ज्यादा जेल में रखना असंवैधानिक है। 

यह निर्देश उस याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें तर्क दिया गया था कि देशभर में कई कैदी अपनी सजा पूरी करने के बावजूद जेलों में रह रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण समय पर रिकॉर्ड अपडेट न होना, अदालत के आदेशों का विलंब से पालन, और कैदियों के कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी बताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को आदेश दिया कि वे एक विशेष अभियान चलाकर ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करें और जहां भी आवश्यक हो, तुरंत रिहाई की प्रक्रिया पूरी करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कैदियों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और समय पर अपडेट अनिवार्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।

इसके अलावा, कोर्ट ने जेल प्रशासन और गृह विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश बनाने को कहा कि सजा पूरी होते ही कैदी को रिहा कर दिया जाए। साथ ही, जेलों में कानूनी सहायता केंद्र (Legal Aid Cells) को और सक्रिय बनाने पर जोर दिया, ताकि गरीब और अशिक्षित कैदियों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम है। इससे न केवल जेलों में भीड़ कम होगी, बल्कि उन कैदियों के साथ हो रहे अन्याय को भी रोका जा सकेगा, जो अपनी सजा पूरी करने के बावजूद बंदीगृह में रहने को मजबूर हैं।

अब राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिवों को तय समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन करना होगा और सुप्रीम कोर्ट को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह कदम न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को मजबूत करने में भी मदद करेगा।

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