SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज, तमिलनाडु–बंगाल–केरल की याचिकाएँ केंद्र में

नवंबर 26, 2025 - 18:13
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SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज, तमिलनाडु–बंगाल–केरल की याचिकाएँ केंद्र में

SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज, तमिलनाडु–बंगाल–केरल की याचिकाएँ केंद्र में

नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025 — चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठा विवाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में नई तीव्रता के साथ उभरा। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कई राज्यों ने SIR को जल्दबाजी में कराई जा रही प्रक्रिया बताते हुए इसे चुनौती दी है। अदालत ने सभी याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई तिथियाँ निर्धारित करते हुए कहा कि बिना चुनाव आयोग की बात सुने प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जा सकती


अलग-अलग राज्यों की याचिकाओं पर निर्धारित हुई सुनवाई तिथियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने तीन प्रमुख राज्यों की याचिकाओं को देखते हुए उन्हें अलग-अलग दिनों में सुनने का फैसला किया।

  • केरल की याचिका पर 2 दिसंबर 2025 को सुनवाई होगी।

  • तमिलनाडु की याचिका 4 दिसंबर को सूचीबद्ध की गई है।

  • पश्चिम बंगाल के मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2025 को होगी, उसी दिन राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी जारी होनी है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही वह SIR प्रक्रिया पर कोई अंतरिम आदेश जारी करेगी।


चुनाव आयोग का पक्ष: SIR देशव्यापी है, आधा काम पूरा हो चुका

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि SIR प्रक्रिया कोई अलग या असामान्य कदम नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग की दलील थी कि—

  • SIR अभियान देश के अधिकांश हिस्सों में 50% से अधिक पूरा हो चुका है।

  • इसे रोकने से आगामी चुनाव चक्र और प्रशासकीय तैयारी प्रभावित होगी।

  • राज्यों में राजनीतिक दलों द्वारा “डर का माहौल” बनाकर इस प्रक्रिया को विवादित किया जा रहा है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि केरल हाईकोर्ट ने इसी तर्क के चलते सुनवाई टाल दी थी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मुद्दे पर विचार कर रहा है।


याचिकाकर्ताओं के गंभीर आरोप: BLO पर दबाव और आत्महत्याएँ

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि SIR को “अत्यधिक जल्दबाजी में” लागू किया जा रहा है, और बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर भारी दबाव डाला जा रहा है। भूषण ने अदालत को बताया कि—

  • लगातार दबाव के चलते कई BLO आत्महत्या कर चुके हैं

  • प्रक्रिया लागू करने का तरीका संवैधानिक और मानवीय सिद्धांतों के विपरीत है।

वहीं, पश्चिम बंगाल की ओर से वकील कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि अब तक 23 BLO की मौत हो चुकी है, जिसे नज़रअंदाज़ करना असंभव है। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा SIR की “अमानवीय परिस्थितियों” को उजागर करता है।

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राजनीतिक और चुनावी पृष्ठभूमि में बढ़ रही संवेदनशीलता

SIR विवाद ऐसे समय में उठ खड़ा हुआ है जब केरल में स्थानीय निकाय चुनाव जारी हैं। केरल सरकार ने दलील दी है कि वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव का प्रभाव सीधे चुनावी प्रक्रिया पर पड़ेगा, इसलिए इसे स्थगित किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी आगामी चुनाव नजदीक हैं, जिससे यह प्रक्रिया राजनीतिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील मानी जा रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि SIR के नाम पर मतदाताओं को सूची से हटाए जाने की आशंका बढ़ रही है।


अगला चरण: 2 से 9 दिसंबर के बीच अहम सुनवाई

अदालत ने संकेत दिया कि दिसंबर के पहले सप्ताह में होने वाली सुनवाइयाँ SIR प्रक्रिया की वैधता और लागू करने के तौर-तरीकों को लेकर दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल SIR जारी रहेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह जल्द ही चुनाव आयोग और राज्यों की दलीलों पर अंतिम निर्णय लेगी।


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