दिल्ली कार विस्फोट की जांच NIA के हाथों में; 'D6' हाई-टेक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश, ड्रोन–रॉकेट हमले की साजिश का खुलासा
दिल्ली कार विस्फोट की जांच NIA के हाथों में; 'D6' हाई-टेक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश, ड्रोन–रॉकेट हमले की साजिश का खुलासा
नई दिल्ली, 19 नवंबर 2025 — दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए कार बम विस्फोट की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस धमाके को आधिकारिक रूप से आतंकी हमला घोषित कर दिया है। जांच में एक अत्याधुनिक और खतरनाक ‘D6’ हाई-टेक टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसका मकसद दिल्ली सहित देश के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर हमले करना था।
धमाके के बाद हुई गहन जांच में NIA ने इस मॉड्यूल से जुड़े कई तकनीकी और वित्तीय सुरागों को एकत्र किया, जिसके आधार पर जम्मू-कश्मीर में एक महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की गई है।
श्रीनगर से जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश गिरफ्तार
NIA ने श्रीनगर में छापेमारी कर जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है, जो अनंतनाग जिले के काजीगुंड का रहने वाला है।
जांच एजेंसी के अनुसार, जासिर आतंकी डॉ. उमर नबी का बेहद करीबी सहयोगी था और दोनों ने मिलकर दिल्ली धमाके की पूरी योजना बनाई थी।
जासिर की गिरफ्तारी को इस नेटवर्क को तोड़ने में सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।
ड्रोन और रॉकेट तकनीक का इस्तेमाल कर बड़े हमले की योजना
NIA की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ‘D6’ मॉड्यूल सिर्फ एक विस्फोट तक सीमित नहीं था, बल्कि भविष्य में:
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ड्रोन आधारित फायर–अटैक सिस्टम,
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कम दूरी की रॉकेट तकनीक,
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तथा स्वचालित विस्फोटक डिलीवरी प्लेटफॉर्म
तैयार करने की योजना बना रहा था।
जासिर पर आरोप है कि वह इस मॉड्यूल का तकनीकी विशेषज्ञ था। वह ड्रोन में बदलाव कर उन्हें विस्फोटक ढोने और टारगेटेड स्थानों तक पहुँचाने की क्षमता विकसित कर रहा था।
एक अधिकारी के अनुसार:
“मॉड्यूल का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में हवाई और भूमि, दोनों दिशाओं से समन्वित हमले करना था। यदि यह योजना सफल हो जाती, तो इसका प्रभाव दिल्ली धमाके से कई गुना अधिक विनाशकारी होता।”
TATP विस्फोटक का उपयोग — दुनिया के सबसे खतरनाक में शामिल
जांच में यह भी पुष्टि हुई है कि दिल्ली कार विस्फोट में TATP (Triacetone Triperoxide) का इस्तेमाल किया गया था। यह वही विस्फोटक है जिसे:
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पेरिस अटैक,
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ब्रसेल्स ब्लास्ट,
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और कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी घटनाओं में उपयोग किया गया था।
TATP की अत्यधिक संवेदनशील प्रकृति के कारण इसे “मदर ऑफ सैटन” भी कहा जाता है।
NIA का कहना है कि TATP तैयार करना आसान नहीं होता और इसके लिए विशेष रसायन और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है, जो जासिर और उमर नबी दोनों के पास मौजूद थी।
नेटवर्क का विस्तार — फंडिंग और लोकल सपोर्ट की जांच जारी
NIA की जांच अब तीन मुख्य पहलुओं पर केंद्रित है:
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तकनीकी सपोर्ट सिस्टम — ड्रोन मॉडिफिकेशन, डिटोनेशन सर्किट, रॉकेट डिजाइन
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फंडिंग चैन — पैसे के स्रोत और डिजिटल लेनदेन
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स्थानीय मददगार — दिल्ली और कश्मीर में लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करने वाले लोग
एजेंसी का मानना है कि यह मॉड्यूल भारत के कई शहरों में सक्रिय “स्लीपर सपोर्ट” की मदद से काम कर रहा था।
दिल्ली धमाका सिर्फ शुरुआत — बड़ा खतरा टला
NIA अधिकारियों का मानना है कि यह मॉड्यूल केवल दिल्ली धमाके तक सीमित नहीं था। जांच से पता चलता है कि समूह ने आने वाले महीनों में:
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बड़े धार्मिक समारोह,
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बाजार क्षेत्र,
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और परिवहन हब
को टारगेट करने की योजना बनाई थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“यह ऑपरेशन समय रहते न रोका जाता तो देश किसी बड़े हमले का सामना कर सकता था।”
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