पुरुषोत्तम मास में श्रद्धालुओं की भीड़ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
पुरुषोत्तम मास में श्रद्धालुओं की भीड़ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
श्रद्धा के आगे छोटा पड़ा इंतजार
अंतिम दिन मथुराधीशजी के दर्शन के लिए लगी कतारें
जननायक संवाददाता
कोटा। सनातन धर्म के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के समापन और सोमवती अमावस्या के महासंयोग ने सोमवार को कोटा के पाटनपोल स्थित ऐतिहासिक श्री मथुराधीशजी मंदिर को भक्ति और श्रद्धा के विराट केंद्र में बदल दिया। पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन सोमवती अमावस्या के एक साथ आने से मंदिर परिसर में सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ श्री मथुराधीशजी मंदिर में पिछले एक माह से चल रहे विशेष धार्मिक अनुष्ठानों, मनोरथों, भोग-सेवा और भक्ति कार्यक्रमों का सोमवार को विशेष समापन हुआ। मंदिर परिसर 'जय श्री कृष्ण, मथुराधीश प्रभु की जय और श्री वल्लभाधीश की जय' के जयघोषों से लगातार गूंजता रहा।
श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक रहा कि मंदिर के मुख्य द्वार खुलने से कई घंटे पहले ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। दर्शन के लिए न केवल कोटा और हाड़ौती क्षेत्र बल्कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तरप्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालुओं को घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ी, लेकिन ठाकुरजी के दर्शन की उत्कंठा के सामने लंबा इंतजार भी छोटा पड़ता दिखाई दिया।
प्रथम पीठ के युवराज मिलन कुमार के अधिकमास के दौरान यहां अधिक वक्त बिताने से इस बार मंदिर की व्यवस्थाएं उत्तम रहीं। उनकी देखरेख में पुलिस प्रशासन एवं सेवादारों ने कुशलता पूर्वक भीड़ प्रबंधन किया जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। दर्शनार्थियों को प्रभु के दर्शन का पर्याप्त समय मिला। यही कारण रहा कि इस बार मथुराधीश मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ का रिकॉर्ड बना। मिलन बाबा ने भी आयोजन में सहयोग के लिए पुलिस प्रशासन तथा सेवादारों का धन्यवाद किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम समय माना जाता है, जबकि सोमवती अमावस्या पितृ तर्पण, दान-पुण्य, शिव आराधना और आत्मशुद्धि का अत्यंत पुण्यदायी अवसर मानी जाती है। ऐसे में दोनों का एक ही दिन पर संयोग बनने से भक्तों में विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।
मंदिर में विशेष दर्शन, राजभोग, संकीर्तन और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए गए। ठाकुरजी को विविध प्रकार के पकवानों, फलों और मेवों का विशेष भोग अर्पित किया गया। मंदिर को आकर्षक पुष्प सज्जा, मनोहारी झांकियों और दिव्य शृंगार से सजाया गया, जिनके दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
पुरुषोत्तम मास के दौरान आयोजित विभिन्न मनोरथों की श्रृंखला का भी सोमवार को विशेष समापन हुआ। पिछले एक माह में हजारों श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के विशेष मनोरथों, झांकियों और सेवा कार्यक्रमों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार पुरुषोत्तम मास में दर्शनार्थियों की संख्या ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
भक्ति, श्रद्धा, सेवा और सनातन परंपरा के अद्भुत संगम के रूप में सोमवार का दिन श्री मथुराधीशजी मंदिर के इतिहास में एक विशेष अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जब पुरुषोत्तम मास की पूर्णाहुति और सोमवती अमावस्या के महासंयोग ने हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मिक शांति और प्रभु भक्ति के सूत्र में बांध दिया।
मथुरा-वृंदावन जैसा माहौल
इस बार पाटनपोल स्थित नंदग्राम में मथुरा-वृंदावन जैसा अहसास रहा। श्रद्धालुओं की भीड़, भगवान के जयकारे तथा लंबी कतारें बगैर धक्का मुक्की के दर्शन ने पुरुषोत्तम मास को यादगार बना दिया। जो लोग मथुरा-वृंदावन के विभिन्न आयोजनों में शामिल होते हैं उनका कहना था कि इस बार तो वहां बिल्कुल मथुरा-वृंदावन जैसा माहौल देखने को मिला। लगा ही नहीं कि हम कोटा में हैं। भक्तों ने भी भगवान मथुराधीशजी में अटूट आस्था दिखाई और लम्बी कतारों के बावजूद धैर्य से अपने नंबर की प्रतीक्षा की।
चित्रों के कैप्शन (Image Captions):
-
मथुराधीशजी मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़। (मुख्य चित्र)
-
दुर्लभ चित्र: तीन पीढ़ी एक साथ: प्रथम पीठाधीश्वर श्रीविठ्ठलनाथ (श्रीवल्लभजी) महाराजश्री, प्रथमपीठ युवराज मिलनकुमार, प्रथमपीठ युवराजानमज श्रीकृष्णचन्द्रबाबा। यह चित्र एक पेंटर ने तैयार किया है। (ऊपर दायां चित्र)
-
ओपेरा और जननायक के निदेशक महेश शर्मा और परिजन दर्शन के लिए कतार में। (बीच का चित्र)
-
मथुराधीशजी मंदिर प्रांगण में दीपक से की गई सज्जा। (नीचे का चित्र)
पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन मथुराधीशजी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के समापन और सोमवती अमावस्या के महासंयोग पर पाटनपोल स्थित ऐतिहासिक श्री मथुराधीशजी मंदिर में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। कोटा सहित हाड़ौती क्षेत्र और राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात तथा उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
मंदिर परिसर पूरे दिन जयकारों और भक्ति भाव से गूंजता रहा। पुरुषोत्तम मास के दौरान चल रहे विशेष धार्मिक अनुष्ठानों, मनोरथों, भोग-सेवा और भक्ति कार्यक्रमों का विशेष समापन किया गया। ठाकुरजी को विशेष राजभोग अर्पित किया गया तथा मंदिर को आकर्षक पुष्प सज्जा और मनोहारी झांकियों से सजाया गया।
श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक था कि घंटों इंतजार के बावजूद भक्तों के चेहरे पर आस्था और उत्साह बना रहा। प्रथम पीठ के युवराज मिलन कुमार की देखरेख में पुलिस प्रशासन और सेवादारों ने बेहतर भीड़ प्रबंधन किया, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रही। श्रद्धालुओं ने इस बार मंदिर परिसर में मथुरा-वृंदावन जैसा आध्यात्मिक माहौल महसूस किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार पुरुषोत्तम मास में दर्शनार्थियों की संख्या ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
आपकी क्या प्रतिक्रिया है?