सबरीमाला मंदिर सोना हेराफेरी मामला: ED की दक्षिण भारत में बड़ी कार्रवाई, 21 ठिकानों पर छापेमारी

जनवरी 21, 2026 - 17:58
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सबरीमाला मंदिर सोना हेराफेरी मामला: ED की दक्षिण भारत में बड़ी कार्रवाई, 21 ठिकानों पर छापेमारी

सबरीमाला मंदिर सोना हेराफेरी मामला: ED की दक्षिण भारत में बड़ी कार्रवाई, 21 ठिकानों पर छापेमारी

सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने की कथित हेराफेरी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। मंगलवार को ED ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में एक साथ 21 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है और इसे दक्षिण भारत की सबसे अहम आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला सबरीमाला मंदिर को चढ़ाए गए सोने के प्रबंधन, शुद्धता और उसके संभावित दुरुपयोग से जुड़ा है। जांच एजेंसी को संदेह है कि मंदिर के सोने की हैंडलिंग, स्टोरेज और ट्रांजैक्शन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनमें बिचौलियों, निजी संस्थाओं और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। ED को इस मामले में पहले से दर्ज FIR और अन्य एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले थे, जिसके बाद यह छापेमारी शुरू की गई।

केरल में सबरीमाला से जुड़े ट्रस्ट, ज्वेलरी कारोबारियों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं तमिलनाडु और कर्नाटक में उन कंपनियों और व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली जा रही है, जिन पर सोने की रिफाइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन या खरीद-फरोख्त से जुड़े होने का शक है। ED की टीमें दस्तावेज, डिजिटल डेटा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।

सबरीमाला मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल करोड़ों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर को बड़ी मात्रा में सोना और कीमती धातुएं दान के रूप में मिलती हैं। ऐसे में इस तरह की हेराफेरी के आरोपों ने न केवल प्रशासनिक हलकों में, बल्कि आम श्रद्धालुओं के बीच भी चिंता पैदा कर दी है।

ED के अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या मंदिर के सोने को तय नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संभाला गया या फिर इसमें संगठित आर्थिक अपराध हुआ है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस कथित हेराफेरी से अर्जित धन को अन्य व्यवसायों या संपत्तियों में निवेश तो नहीं किया गया।

इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ नेताओं ने इसे आस्था से जुड़े मामले में गंभीर विश्वासघात बताया है, जबकि कुछ ने जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील की है। मंदिर प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला न केवल आर्थिक अपराध का, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी बड़ा उदाहरण बनेगा। आने वाले दिनों में ED की जांच से कई अहम खुलासे होने की संभावना है और इस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

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