राजस्थान विधानसभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस का प्रदर्शन
राजस्थान विधानसभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस का प्रदर्शन


राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित Rajasthan Vidhan Sabha में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला। कांग्रेस विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष Tikaram Jully के नेतृत्व में विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
विधायक पहले विधानसभा परिसर में एकत्र हुए और वहां से पैदल मार्च निकालते हुए सदन तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और समझौते को “किसान-विरोधी” तथा “छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ” बताया। प्रदर्शन के दौरान कई कांग्रेस विधायक ‘PM is Compromised’ लिखी टी-शर्ट पहनकर सदन में पहुंचे, जो पूरे घटनाक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
समझौते पर गंभीर आरोप
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संसद और राज्यों को विश्वास में लिए बिना किया गया है, जो देश के संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है। उनका कहना था कि इतने महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले में राज्यों की भूमिका को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।
कांग्रेस का दावा है कि इस समझौते के बाद तेल बीज और कपास जैसी फसलों के दामों में गिरावट आई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आयात को बढ़ावा मिलने से घरेलू बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों पर भी दबाव बढ़ा है।
सदन के भीतर और बाहर हंगामा
विधानसभा के अंदर भी कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने चर्चा की मांग की और सरकार से जवाब मांगा। कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही भी प्रभावित रही। कांग्रेस ने मांग की कि राज्य सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाए और किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र से बातचीत करे।
सत्ता पक्ष का जवाब
सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को “राजनीतिक और निराधार” बताया। सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि व्यापार समझौते से निर्यात के नए अवसर खुलेंगे और राज्य के उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलेगा। उनका दावा है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
राजनीतिक असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। जहां कांग्रेस इसे किसान और व्यापारियों के हितों से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे विकास और आर्थिक अवसरों से जोड़कर प्रस्तुत कर रहा है।
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